Monday, October 22, 2007

इंटरनेट पर नक्सलवाद के खिलाफ़ पहला वैचारिक फोरम

वेब-भूमि-10

लुकीज़ क्या बला है ?
पिछले दिनों मेरे नाम छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश से एक मित्र का ई-मेल आया । उनकी समस्या है कि वे हिंदी में टाइप करना नहीं जानते किंतु चाहते हैं कि अपने रिश्तेदार को, जो इन दिनों जापान में किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी करते हैं, हिंदी में मेल करें । यानी कि उन्हें ऑनलाइन संवाद करने की कोई तकनीक चाहिए । शायद यही समस्य़ा आपकी भी हो तो चलिए इस बार हम ऐसे ही एक नये औजार या टूल्स के विषय में चर्चा करते हैं जो मेरे मित्र जैसे कई लोगों की समस्या का निदान हो ।


लूकीज़ वह सॉफ्टवेयर है जो इस समस्या का हल है । यह पूर्णतः मुफ़्त है । यानी कि इसे आप बिना किसी खर्च के डाउनलोड़ कर सकते हैं । इसे अपने कम्पयूटर पर इंस्टाल करके प्रतिष्टित कर लेने पर आप बड़ी सरलता से बिना टायपिंग जाने भी हिंदी में ई-मेल कर सकते हैं । चैटिंग कर सकते हैं । कुल मिलाकर यह एक ऑनलाइन शब्द संवाद की सुविधा मुहैया कराने वाला ऐसा उपकरण है जिसे हम ऑनलाइन संवाद भी कह सकते हैं । इतना ही नहीं यह ऑफलाइन टायपिंग कार्य भी करता है- वह भी सिर्फ़ हिंदी भाषा की देवनागरी लिपि में नहीं अपितु अंगरेज़ी सहित बांग्ला, तेलगू, मराठी, तमिल, गुजराती, कन्नड़,
मलयालम एवं पंजाबी भाषाओं का समर्थन भी है उसे ।

लूकीज मूलतः भारतीय भाषाओं का सॉफ्टवेयर है जो कि चैट,ई-मेल एवं ऑन लाईन शब्द सम्वाद प्रदान करता है, वह भी आश्चर्यचकित वास्तविक की बौर्डों के साथ। कहने का आशय है कि आपके कंप्यूटर स्क्रीन में ऐसा मार्गदर्शक की बोर्ड खुलता है जिसमें अंकित शब्द कुंजी को दबा-दबाकर आप हिंदी या अन्य किसी भारतीय भाषा में टाइप कर सकते हैं । माना कि आपको संजय द्विवेदी टाइप करना है तो आपको इन अक्षरों के की-बोर्ड पर मात्र क्लिक करते जाना है । आप जिन-जिन बटनों या की बोर्ड पर क्लिक करते जायेंगे वैसे-वैसे शब्द या वाक्य आपके द्वारा खोले गये वर्ड फाइल में अंकित होता चला जायेगा । इसे आप सेव या सुरक्षित भी रख सकते हैं । और जब चाहें अपना संदेश या लेख किसी वेब पत्रिका को भेज सकते हैं । है ना जादू । तो चलिए फटाफट इंटरनेट जोड़ कर अपना मुफ्त लूकीज़
तुरंत डाउनलोड करें। लूकीज़ ऑन लाईन आपकी मनपसंद इंटरनैट वैबसाईटों, ई-मेल एवं चैट्स को भारतीय भाषाओं के अनुरुप ढाल देगा। इसे आप www.keyboard4all.com/ नामक वेबसाइट से डाउनलोड़ कर इंस्टाल कर सकते हैं ।

गूगल सबसे बड़ी मीडिया कंपनी
सभी को पता ही है कि सर्च इंजन गूगल पर संभवत: हर तरह की जानकारी खोजी जा सकती है । इंटरनेट पर उपलब्ध तकरीबन हर तरह की जानकारी खोज निकालने वाला सर्च इंजन 'गूगल' दुनिया की सबसे बड़ी मीडिया कंपनी बन गया है । स्टॉक मार्केट के आकलन के मुताबिक गूगल ने बाकी सभी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है और उसके शेयरों की कीमतें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं । पिछले दिनों न्यूयार्क स्टॉक बाज़ार में गूगल के शेयरों की क़ीमत 80 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी । यह राशि सबसे बड़ी मीडिया कंपनी मानी जाने वाली टाइम वार्नर के शेयरों की कीमत से दो अरब अधिक थी । हालांकि गूगल की सालाना बिक्री टाइम वार्नर के मुक़ाबले बहुत अधिक कम है। गूगल को सालाना 3.4 अरब डॉलर की आय होती है जबकि टाइम वार्नर को सालाना 42 अरब डॉलर की आय होती है । कुछ जानकारों का मानना है कि गूगल के शेयरों की क़ीमत कुछ ज्यादा रखी गई है और ऐसा 1990 के दशक में इंटरनेट क्रांति की शुरुआत के दौरान भी हुआ था । अन्य लोग मानते हैं कि गूगल के शेयरों की बढ़ती कीमत दर्शाती है कि आने वाले दिनों में गूगल कितना आगे जा सकती है. कहा जा रहा है कि आने वाले समय में गूगल के एक शेयर की कीमत 325 से 350 डॉलर तक हो सकती है । गूगल ने दस महीने पहले ही पब्लिक कंपनी के तौर पर व्यापार करना शुरु किया था और इसी अरसे में मीडिया कंपनियों में उसकी स्थिति सबसे मज़बूत हो गई है । पिछले कई सालों से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही कई मीडिया कंपनियां मसलन वाल्ट डिज़नी और वायकॉम से कहीं आगे निकल गई हैं । गूगल ने पिछले साल अगस्त में जब अपने शेयरों को बाज़ार में उतारा था तो इसके एक शेयर की क़ीमत 85 डॉलर थी । गूगल की अधिकतर आय उसके सर्च इंजन पर प्रकाशित होने वाले विज्ञापनों से होती है ।


नक्सलवाद के विरोध में देश का पहला वेबसाइट तैयार –
इन दिनों छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर के शिविरों में भले ही आदिजन कुव्यवस्था के शिकार हों । भले ही सलवा जुडूम के कर्ता-धर्ता अपने स्वार्थ से नक्सलवाद का विरोध करते हों पर पूरे विश्व में पहली बार हिंसावादियों के खिलाफ शुरू हुए आदिवासियों की इस पहली क्रांति की वैचारिक ज़मीन तैयार करने के लिए एक वेबसाइट शुरू हो चुकी है । जहाँ सलवा जुडूम आंदोलन से जुड़ी सम्यक बातें पढ़ी जा सकती हैं । इस पहल के लिए वेब साइट के संपादक सद्भावना समिति, रायपुर के तपेश जैन की भूमिका का जिक्र किया ही जाना चाहिए जिसे अंतरजाल पर
www.salvajudum.com में लॉग ऑन कर देखा-परखा जा सकता है । इसे नक्सलवाद के खिलाफ देश का पहला वैचारिक और बौद्धिक फोरम कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी । इस स्वयंसेवी प्रयास के लिए सद्भावना समिति को भी बधाई । बधाई इस बात की भी कि हिंदी के विविध विषयों पर जाल स्थलों की संख्या भी बढ़ रही है ।

6 comments:

अनुनाद सिंह said...

यह अच्छा कार्य है। जानकारी देने के लिये साधुवाद!

जनता द्वारा स्वेच्छा से किया गया कार्य ही आशा का सबसे बड़ा स्रोत है।

Sanjeet Tripathi said...

शुक्रिया जानकारी के लिए!!

सलवा जुडूम के कर्ता धर्ताओं और नक्सल राजनीति के बीच पिसती-मरती तो आम जनता ही है, जब तक हम सब इसके खिलाफ़ उठ खड़े न होंगे तब तक यह आदिवासी मारे ही जाते रहेंगे!!

संजीव कुमार सिन्हा said...

नक्‍सलवादी आतंकवाद का खात्‍मा करना ही होगा। इस दिशा में यह प्रयास स्‍तुत्‍य है।

Aditya said...

I really liked ur post, thanks for sharing. Keep writing. I discovered a good site for bloggers check out this www.blogadda.com, you can submit your blog there, you can get more auidence.

Anonymous said...

the so-called spontaneous peace march salwa judum is nothing but RSS sponsored theory of RKG Thomson to apply strategic hamletting to cut the fighting guerillas from the masses. The BJP government is busily publicising its Hindutava methodology among the tribes of bastar. The Salwa judum people are engaged in arson, murder and raping tribal women. It is being supported by treachouras Mahendra Karma, the so-called doyen of tribal people. SJ will never get success to wipe out maoism from Bastar. In the history of people's republic such type of government sponsored movements take place but die very soon due to lack of accountibility in mass support. The SJ website is also creation by Saffron people. Please don't try to deviate history. Feudal and reactionary elements will never see the light of rising sun.

Narayan Singh Chauhan
Journalist
Raipur (Chhattisgarh)
98274-09764

महेंद्र मिश्रा said...

इस दिशा में यह प्रयास स्‍तुत्‍य है । जानकारी देने के लिये शुक्रिया