Friday, January 04, 2008

चिट्ठेकारों, तकनीकिविदों, जाल स्थल विशेषज्ञों, संपादकों से आग्रह

“अंतरजाल, ब्लॉग और साहित्य”
संपादित कृति हेतु आलेख-संदर्भ आमंत्रण


मित्रो !

अंतरजाल में हिंदी के विकास और उन्ननयन हेतु अब तक उपलब्ध तकनीक, हिंदी भाषा, साहित्य, संचालित जाल स्थल, साहित्यिक चिट्ठों(blogs) पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण शोध कृति का लेखन-संपादन किया जा रहा है । यद्यपि मेरा लेखन कार्य अंतिम चरणों पर है तथापि मैं इसे संपूर्ण नहीं मानता क्योंकि सर्वज्ञता हासिल करना कठिन है सबको समेट पाना दुष्कर है और दिन-प्रतिदिन अंतरजाल पर नयी सुविधायें भी बढ़ रही हैं । और उधर नये चिट्ठेकार भी अंतरजाल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं । ऐसे में मैं ज़रूरी समझता हूँ कि अंतरजाल पर सक्रिय विद्वास और सक्रिय साथी से क्यों ना एक बार आग्रह कर लिया ताकि उनके पास संचित जानकारी को भी इसमें हिंदी के पाठकों खासकर साहित्यकारों के लिए समायोजित किया जा सके । और अपनी अद्यतन जानकारी की भी पुष्टि हो सके-

स्पष्ट है कि इस किताब का मुख्य विषय वस्तु निम्नांकित है –

1. हिंदी लेखन, अन्य कार्यों को समर्थन देने वाले समस्त साधन (तकनीक-साफ्टवेयर)

2. भविष्य में अंतरजाल पर हिंदी लेखन सहित अन्य समस्त साधनों की संभावना ।

3. हिंदी साहित्य को गति देने वाले प्रमुख चिट्ठों, विषय वस्तु आदि का संक्षिप्त विवरण ।

4. हिंदी ब्लॉगों की विषय वस्तु और उनके चिट्ठाकारों की संक्षिप्त जानकारी ।

5. हिंदी ब्लॉगिंग के विकास में उपयोगी एग्रीगेटर और उनकी संक्षिप्त जानकारी ।

6. हिंदी ब्लॉगिंग की सामान्य समस्यायें ।

7. हिंदी ब्लॉग पर प्रमुख मार्गदर्शकों की संक्षिप्त जानकारी ।

8. हिंदी साहित्य के प्रमुख जाल स्थल ।

9. हिंदी के सभी प्रकार के जाल स्थल, उनकी उपयोगिता(अब तक ज्ञात)-शासकीय, निजी, संस्थागत ।

10. अन्य सम्यक् जानकारी एवं मूल्याँकन

11. प्रमुख रचनाकारों के ब्लॉग संबंधी लेख

कुल मिलाकर यह -
1. हिंदी हेतु उपलब्ध या संभावित तकनीक,
2. ब्लॉग और संचालित जाल स्थल और
3. ब्लॉग तथा जाल स्थलों पर अब तक स्थापित हिंदी साहित्य के मूल्यांकन पर अभिकेंद्रित होगा ।

मैं यह कार्य सर्च इंजन के सहारे ही पूरा कर रहा हूँ परंतु मुझे आप पर अधिक भरोसा है । आपसे आग्रह है कि आप निःसंकोच अपने कोश-स्मृति में सुरक्षित जानकारी मुझे भेज सकते हैं ताकि उन्हें भी यथोचित स्थान पर जोड़ा जा सके । मैंनें ऐसे सभी सूचनाओं का संदर्भ बाकायदा उनके नाम सहित दिया है फिर भी नयी जानकारी देने वालों का संदर्भ यथोचित स्थल पर समायोजित किया जा सकेगा ।

अपनी जानकारी में संचालित साइट व ब्लॉग के बारे में भी संक्षिप्त टिप्पणी भेज सकते हैं ।

आपसे प्राप्त जानकारी को समायोजित करने के पश्चात इस पांडुलिपि-कृति को ऑनलाइन रखने का भी प्रयास किया जायेगा ।

यह जटिल कार्य मूलतः 16-17 फरवरी 08 को होने वाले अखिल भारतीय साहित्य महोत्सव के लिए तैयार किया जा रहा है ताकि उक्त अवसर पर उपस्थित देश-विदेश के साहित्यकारों को यह कृति दी जा सके । उन्हें अंतरजाल पर हिंदी लेखन/साहित्य-लेखन से जोड़ा जा सके । क्योंकि अभी भी दूरदराज के लेखक अंतरजाल सुविधा के बावजूद भी हिंदी और साहित्य को वैश्विक बनाने में संलग्न नही है ।

(आयोजन के बारे में विस्तृत जानकारी हेतु देख सकते हैं) -
- टिप्पणी, आलेख, संदर्भ भेजने का पता -
srijan2samman at gmail.com
तिथि
आपकी सुविधानुसार पर शीघ्रातिशीघ्र

8 comments:

अनुनाद सिंह said...

यह कार्य महान है; निश्चित ही इसका परिणाम भी महान होगा। इस कार्य की रूपरेखा को ही देखकर मुझे पूरा विश्वास है कि यह अन्तरजालीय हिन्दी को एक नयी उँचायी पर ले जायेगा।

बहुत-बहुत साधुवाद एवं शुभकामनाएं!

Shiv Kumar Mishra said...

बहुत बढिया काम कर रहे हैं सर. जैसा कि अनुनाद जी ने कहा, यह एक महान कार्य है और इसके परिणाम भी अच्छे होंगे. हमारी शुभकामनाएं आपके साथ है.

संजय बेंगाणी said...

शुभकामनाएँ.

संजीव कुमार सिन्हा said...

आप राष्‍ट्रभाषा हिन्‍दी की सेवा कर रहे है। शुभकामनाएं।

Sanjeet Tripathi said...

शुभकामनाएं

Lavanyam - Antarman said...

हिन्दी के सच्चे सेवक तो आप हैं जयप्रकशामानस जी ...आपके इस विशाल कार्य की सफलता के लिए साधुवाद !

Devi Nangrani said...

Sipaahi ban kar karya kar rahe ho. Apne lakshay ki or jaata hua har pag kamyabi ki raah par rahe isi shubhkamna ke saath
Devi Nangrani

Anonymous said...

यह कार्य महान है; और इसका परिणाम भी महान होगा। इस कार्य की व्‍यापकता को ही देखकर मुझे पूरा यकीन है कि यह अन्तरजालीय हिन्दी को एक नयी उँचायी पर ले जायेगा। लेकिन हिन्‍दी के गैर यूनिकोड के अनेक फॉंट जो बाजार में उपयोग किये जा रहे हैं उनको एक जगह परिवर्तित करने की मुफ्त सुविधा (ऑन लाईन) प्रदत्‍त करने की ओर अगर कदम बढाये जाते हैं तो आपकी हिन्‍दी भाषा को नेट पर उपयोग करनेवालों पर बडी कृपा होगी और सचमुच में आप द्वारा संकल्पित ऐसे महान कार्यों को निस्‍वार्थ बुद्धि और जनमानस के कल्‍याण हेतु एक महत्‍वपूर्ण योगदान होगा ।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद एवं इस भगीरथ प्रयास के लिये हार्दिकशुभकामनाएं!

देवीदास, ईसीआईएल, हैदराबाद