Wednesday, December 13, 2006

आपके घर से आकाशवाणी !

हो सकता है आपको मेरी बातों पर सहसा विश्वास न हो । शायद आपके मन में यह विचार भी आ जाये कि मैं किसी आध्यात्मिक प्रसंग पर कहना चाहता हूँ पर जिन्हें इंटरनेट प्रौद्योगिकी की क्रांतिकारी शक्तियों की जानकारी हो वे बखूबी समझ सकते हैं कि मैं किसी ढोंगी तांत्रिक की भाँति कोई अंधविश्वास नहीं फैलाना चाहता बल्कि इंटरनेट रेडियो या ऑनलाइन रेडियो प्रसारण की बात करना चाहता हूँ । जी हाँ! यदि आप ऐसा सोचते हैं, तो ठीक सोचते हैं और संभव है कि आपका कोई निजी रेडियो स्टेशन भी हो ।

प्रसारण की दुनिया में यह जादू कर दिखाया है अंतरजाल यानी इंटरनेट ने । दरअसल इस सफलता के पीछे है मल्टीमीडिया को इंटरनेट की सौगात-वर्ल्ड वाइड वेब, कहने का आशय विश्वव्यापी जाल । कदाचित् इन्हीं कारणों से इंटरनेट को हिंदी के भाषाशास्त्री ‘विश्वजाल’ कहते हैं । जो भी हो.... अब आप जब चाहें अपना निजी आकाशवाणी (रेडियो स्टेशन) घर से संचालित कर सकते हैं । यह क्षमता आपके नज़दीक पहुँच चुकी है । इसके लिए आपको प्रसारण मंत्रालय के नियमों-कायदों का भी पालन करने की कोई जरुरत नहीं । भारी-भरकम अमला खड़ा करने के लिए लाखों-करोडों की भी जरूरत नहीं । बस आप तय कर लें कि आपके रेडियो स्टेशन से प्रसारण किन विषयों पर केंद्रित रहेगा? आप गाने सुनायेंगे या समाचार या दोनों ही? कारोबारी दुनिया पर प्रसारण करेंगे या घर-द्वार पर? प्रसारण की भाषा भी आपको ही तय करनी होगी । बशर्ते कि आपके पास हो एक कंप्यूटर, मॉडम, लाइड स्पीकर और इंटरनेट का कनेक्शन । सच मानिए, इससे आप अपने आसपास तक ही नहीं अपितु विश्व के किसी भी कोने तक प्रसारण कर सकते हैं । यानी आपके रेडियो प्रसारण की कोई सीमा नहीं । वह भी चौबीसों घंटे । ठीक वैसे ही जैसे चौबीसों घंटे Live365.com प्रसारित करता है ।

इसे आईटी के विशेषज्ञों का कमाल ही कहिए कि अब तकनीकी दुनिया में ऐसे सॉफ्टवेयर ईजाद किये जा चुके हैं जिनसे डिजिटल रिकार्डिंग को किसी भी कंप्यूटर के मेमोरी या भंडार में रखा जा सकता है । इसे इंटरनेट पर प्रसारित कर दिया जाता है जिसे श्रोता का कंप्यूटर तुरंत ग्रहण कर सकता है और लगातार ऑनलाइन सुन सकता है । यह तकनीक को MBONE (IP Multicast Backbone on the Internet) कहलाता है ।

जबसे टेलीफोन लाइन पर डिजिटल सामग्री के प्रसारण की शुरुआत हुई है, रिकार्ड की गई आवाज़ को दुनिया में कहीं भी भेजना संभव हो गया लेकिन इस आवाज़ को तभी सुना जा सकता था, जब संपूर्ण डिजीटल रिकार्डिंग को पहले श्रोता का कंप्यूटर ग्रहण न कर ले और अपने पीसी में संग्रहित न कर ले । इसके पश्चात ही वह इस ध्वनि फाइल को साउंड सॉफ्टवेयर पर चला कर सुन सकता था । तब इस प्रसारण को तत्क्षण सुनने की क्षमता नहीं होने के काण उस प्राप्त रिकार्डिंग को सुनना रेडियो सुनने जैसा नहीं था । वह किसी सीडी या कैसेट को सुनने जैसा था । लेकिन वर्ल्ड वाइड वेब के मार्फत अब प्रसारण को तत्क्षण व निरंतर सुनने की क्षमता विकसित हो चुकी है और इसने संपूर्णतः रेडियो का रूप ग्रहण कर लिया है । है न ताजुब्ब की बात!


ऐसे रेडियो स्टेशन की संपूर्ण दुनिया तक पहुँच शक्ति के पीछे है इनका अपने संकेतों को टेलीफोन लाइनों के जरिए भेजा जाना जबकि पुराने ढंग के रेडियो स्टेशनों में संकेत वायुतंरगों के द्वारा भेजा जाता था । इस तथ्य में सबसे खास बात है इन रेडियो स्टेशनों को स्थापित करने के लिए मंहगे ट्रांसमीटरों और प्रसारण केंद्रों की भी अब आवश्यकता नहीं रह गई है । सच तो यह भी है कि इसके लिए कोई लाइसेंस लेने की भी दरकार नहीं ।


आवश्यक सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर

अब शायद आप यह जरूर पूछना चाहेंगे कि रेडियो केंद्र को संचालित करने के लिए क्या-क्या आवश्यक है । लीजिए, वह भी बताये देते हैं- पहला- ऐसा सॉफ्टवेयर जिससे आप वेब रेडियो स्टेशनों से प्रसारित ध्वनि अर्थात् गीत-संगीत, बातचीत आदि को सुना सकें । इन सॉफ्टवेयरों में वैसे तो प्रोग्रेसिव नेटवर्क का रियल आडियो (Real Adio) सबसे पसंदीदा है तथापि अब तो कई सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं जिनमें विंडो मीडिया प्लेयर, विनएम्प, झिंग प्लेयर्स, क्विक टाइम, आई ट्यून्श प्रमुख हैं । विंडो मीडिया प्लेयर्स तो Windows xp आदि ऑपरेटिंग सिस्टम में बाय डिफाल्ट है । अर्थात् इसके लिए अतिरिक्त खर्च भी नहीं । उपर्युक्त सभी ध्वनि केंद्रित सॉफ्टवेयर्स मुफ्त में डाउनलोडेबल हैं । आप चाहे तो इनमें से कोई भी मनपंसद सॉफ्टवेयर www.downlod.com से मुफ़्त में डाउनलोड करके इंस्टाल कर सकते हैं । वैसे इन सॉफ्टवेयरों को उनके नाम के वेबसाइट से भी डाउनलोड किया जाना अति सरल है । इन दिनों इंटरनेट पर संचालित अधिकांश ऑनलाइन रेडियो स्टेशनों में इन्हीं सॉफ्टवेयरों का उपयोग किया जा रहा है । इनमें भी रियल आडियो का लेटेस्ट वर्जन लेना अधिक फायदेमंद होगा क्योंकि इससे अच्छी स्टीरियो जैसी आवाज़ पायी जा सकती है । इसके अलावा शिंग टेक्नोलॉजी के स्ट्रीमवर्क्स और लिक्विड आडियो के लिक्विड म्युजिक प्लेयर सॉफ्टवेयर को भी आजमाया जा सकता हैं ।

दूसरा – कोई पंसदीदा वेब खोजक (ब्राउजर) । जैसे नेटस्केप नेवीगेटर या फॉयरफॉक्स । यहाँ हम माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट एक्सप्लोरर का जिक्र जानबुझकर नहीं कर रहे हैं क्योंकि यह भी विंडो में बायडिफाल्ट होता है और अधिकांश भारतीय विंडो ऑपरेटिंग सिस्टम ही काम में ला रहे हैं । ब्राउजर की उपयोगिता इसलिए भी है कि इससे मनमाफिक भाषा या विषय का रेडियो चैनल सर्च किया जा सके । तब तो और जरुरी है जब आप केवल इंटरनेट सुनना चाहते हैं ।

जैसा कि हम इंटरनेट कनेक्शन के बारे में पहले ही बता चुके हैं यह वेब रेडियो की रीढ़ है । सामान्य घरेलू कनेक्शन में देखा गया है कि रेडियो का प्रसारण ठीक से नहीं हो सकता क्योंकि इसमें डेटा ट्रांसफर रेट कम होता है । उचित होगा कि आप कोई ब्रॉडबैंड या और उन्नत नेट सर्विस की सेवा ले लें । ऐसा करने से आपके रेडियो स्टेशन का प्रसारण विश्व के किसी भी कोने तक पहुँचना सरल हो सकेगा । कुल मिलाकर ये अग्रांकित न्यूनतम किन्तु अपरिहार्य चीजें भी आपके पीसी में हों –विंडो 98, 2000, मिलेनियम या एक्सपी वर्सन का ऑपरेटिंग सिस्टम । 128 एमबी रैम, पैंटियम, 600 मैगाडर्टज् या अधिक उन्नत प्रोसेसर, न्युनतम 128 केवीएस स्पीड वाला इंटरनेट कनेक्शन, जावास्क्रीप्ट सहित इंटरनेट एक्सप्लोरर । पॉपअप निरोधक फायरवॉल । एक एमपी-3 प्लेयर ।

कितने ही रेडियो स्टेशन

इतनी चीजों की व्यवस्था हो जाने पर आप किसी भी रेडियो नेटवर्क की जानकारी के लिए इंटरनेट पर सर्च कर सकते हैं । वैसे इन दिनों कई ऐसे वेबसाइट हैं जो रेडियो नेटवर्क की सूची उपलब्ध करा रहे हैं । उदाहरण के लिए प्रोग्रेसिव नेटवर्क की जानकारी के लिए www.timecast.com पर लॉग ऑन करें । यहाँ 400-500 वेब-रेडियो के पते हैं । या फिर मुफ़्त इंटरनेट रेडियो स्टेशनों की जानकारी के लिए रेडियो फ्री वर्ल्ड पर जायें । इसका पता है www.radiofreeworld.com । यहाँ दुनिया भर के वेबरेडियो केंद्रों की विस्तृत जानकारी और लिंक उपलब्ध है । उदाहरण बतौर www.ktru.org टेक्सास के राइस युनिवर्सिटी के छात्र द्वारा संचालित ऑनलाइन रेडियो है जहाँ आप शैक्षणिक जानकारी ले सकते हैं । इनमें से कुछ ऐसे हैं जो आपको अपना रेडियो स्टेशन केंद्र स्थापित करने का मुफ़त आमंत्रण देते हैं और कुछ नाममात्र का रजिस्ट्रेशन शुल्क लेकर सेवा उपलब्ध कराते हैं । live365.com एक ऐसा रेडियो केंद्र है जहाँ विश्व भर के कई देशों की साइटों की डायरेक्टरियाँ हैं । उदाहरण स्वरूप अनुराग के रेडियो स्टेशन (www.live365.com/stations/anupam2005)पर आप भारतीय शास्त्रीय संगीत सुन सकते हैं । यह साइट आपको कुछ शर्तों के साथ अपना इंटरनेट रेडियो स्थापित करने की सुविधा दे सकता है । वैसे आपकी आवाज़ मधुर है । दो-चार मित्र आपके साथ इस काम में नाम और दाम दोनों कमाना चाहते हैं तो कुछ ही रुपया खर्च कर अपना स्वतंत्र वेबसाइट बनाकर भी ऑनलाइन रेडियो प्रसारण कर सकते हैं ।

हिंदी के इंटरनेट रेडियो

ऑनलाइन संगीत स्टेसन (24x7)
Haagstad Radio, The Hague

रिकार्डेड समाचार स्टेशन

आंशिक हिंदी प्रसारण स्थानीय केंद्र
अब तो जाने कितनी तरह की वेब रेडियो इंटरनेट पर सक्रिय हैं । कोई पश्चिमी धुन सुनाता है तो कोई पूर्वी दुनिया का कोई राग । कोई शास्त्रीय संगीत सुनाने के लिए चल रहा है तो कोई मात्र आधुनिक संगीत । शुरु-शुरु में आपको भी इन्हें इंटरनेट पर तलाशना पडेगा । ठीक जैसे मैंने तलाश की । हुआ क्या कि मैं एक दिन यूँ ही इंटरनेट पर ऐसे रेडियो स्टेशनों के बारे में जानने के लिए बेताब था जहाँ कविताएँ सुनी जा सकें और जिन्हें सुनने में कोई बाधा न हो यानी कि कि ऐसा इंटरनेट रेडियो जहाँ पॉप-अप विज्ञापन न हों या कम हों, और नए पुराने गाने भी बीच-बीच में चलते रहें।

इस तलाश के दौरान मिली किसी माइक भाई की वेब-साइट – माईक्स रेडियोवर्ल्स यानी कि www.mikesworld.com । माइक ने बकायदा सूची बना रखी है दुनिया भर के ऐसे रेडियो स्टेशनों की जो इंटरनेट पर प्रसारण करते हैं। इनकी संख्या 3000 से कम कहीं अधिक है । दक्षिण और पूर्व एशिया की सूची में भारत का कहीं नाम नहीं है। हाँ वीएसएनएल (www.internet.vsnl.com )ने दो स्टेशन प्रारंभ किया है जो 24*7 प्रसारण करता है । इसमें से एक है हिंदी भजन चैनल और दूसरा तमिल चैनल । ऐसा कुछ अब आकाशवाणी से तो उम्मीद कर नहीं सकते कि लगातार अपने कार्यक्रम वेबकास्ट करे। सिंगापोर का एक स्टेशन है, जो ठीक से चलता नहीं है। मध्य-पूर्व के स्टेशनों में संयुक्त अरब अमीरात का सिटी १०१.६ (http://asx.abacast.com) है, जो अच्छा है। यहाँ हिंदी भाषियों के लिए काफी कुछ प्रसारित होता रहता है । इसके अलावा यूरोप, अमरीका और अफ्रीका की सूचियों में भी कई स्टेशन हैं जो भारतीय संगीत बजाते हैं। वैसे यहाँ 3000 सभी इंटरनेट रेडियो की सूची को उनके प्रसारण चरित्र और प्रसारण स्थल के आधार पर सूचीबद्ध किया गया है । इसलिए ढूँढने वालों के लिए कोई कठिनाई कि वे किस देश की किस भाषा में संगीत सुनना चाहते हैं । पर गूगल से खोजने पर एक और इंटरनेट रेडियो स्टेशन मिला जिस का नाम तो बकवास(www.rediobakwaas.com) है, पर काम बढ़िया करता है। बस एक बार साइन-अप करना पड़ता है। वैसे यह अब लगता है बंद हो चुका है । पर देशीहिट नामक एकसाइट(www.desihitsradio.com) अपना काम शुरु कर चुका है जहाँ आप हिंदी फिल्मी गाने सुन सकते हैं । वैसे आकाशवाणी(Air) का पुराना यूआरएल भी वहीं ले जाता है। सुना है वह जल्दी ही ऑनलाइन रेडियो की सुविधा जल्दी ही देश के सभी क्षेत्रों पहुँचाने वाली है । मस्त रेडियो और रेडियो तराना नामक दो अच्छे रेडियो स्टेशन के लिंक यहाँ भी हैं - www.hindilink.com/hindi_radio.html

गूगल, एमएसएन आदि सर्च इंजिनों की सहायता से 10 हजार से अधिक रेडियो स्टेशनों की सूची देखते ही देखते संग्रहित की जा सकती है और जिसके माध्यम से विश्व के किसी भी संस्कृति के बारे में घर वैठे जाना जा सकता है । जब मैं ऐसे किसी पसंदीदा रेडियो स्टेशन पर कुछ खास सुनता रहता हूँ तो मन ही मन उस वैज्ञानिक का धन्यवाद ज्ञापित करता रहता हूँ जिसे Carl Malumud के नाम से सारे विश्व में जाना जाता है और जिसने 1993 में दुनिया का पहला इंटरनेट रेडियो स्टेशन विकसित किया था ।

इंटरनेट रेडियो या वेब रेडियो बड़ी काम की चीज है । दुनिया में इसका उपयोग सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं अपितु शिक्षा, सूचना और संचार सहित वैकासिक कार्यकमों के लिए भी हो रहा है । इसी तकनीक का फायदा उठाकर युनेस्को ने भी श्रीलंका के डाक, तार एवं दूरसंचार मंत्रालय मंत्रालय तथा श्रीलंका ब्रॉडकॉस्टिंग कार्पोरेशन, कोलम्बो विश्वविद्यालय के सहयोग से इंटरनेट रेडियो संचालित किया जा रहा है जिसकी सहायता से सेंट्रल श्रीलंका के कुछ हिस्सों जैसे काटमले, गम्पोला, नवलपिटिया, और दिसपाने आदि ग्रामीण क्षेत्रों में ई-लर्निंग का काम साधा जा रहा है । इस इंटरनेट रेडियो संचालन में स्थानीय लोग प्रवीण हो चुके हैं जिसमें 50 प्रतिशत यूजर्स महिला हैं । अधिकांश 15 से 20 आयु वर्ग हैं । इसमें से 70 प्रतिशत उपयोगकर्ताओं के पास कंप्यूटर भी है ।

जो लोग यह सोचते हैं कि लेटे-लेटे रेडियो सुनना और कंप्यूटर पर बैठे-बैठे इंटरनेट रेडियो में ज़मीन-आसमान का फ़र्क है । सच है कंप्यूटर पर रेडियो सुनना कठिन काम है पर सच खुश होइए कि इसका भी निदान किया जा चुका है । 'इनट्यून' नामक एक छोटा-सा रेडियो है जो किसी भी कंप्यूटर से वायरलैस यानी बेतार तकनीक से जुड़ सकता है । ब्रिटेन के मैनचेस्टर स्थित कंपनी पीडीटी पोर्टेबल प्लेयर तैयार करनेवाली कंपनी, पीडीटी के प्रबंध निदेशक डेविड होल्डर का कहना है कि " इंटरनेट रेडियो एक उपलब्धि है क्योंकि कंप्यटूर के पास बैठ कर कोई भी संगीत नहीं सुनना चाहता था, इनट्यून की मदद से अब कोई भी कंप्यटूर के निकट बैठे बिना रेडियो सुन सकेगा।" आप कुछ भी कहें, पर रेडियो तरंगे ऐसी तकनीक है जिससे यह संभव है ।

तो आप अपना इंटरनेट रेडियो लांच करने के लिए तैयार हैं ना ! एक बार प्रयास करके तो देखिए । वैसे आपको पूरी छूट है कि समाचार, विचार, फिल्म, संगीत, कृषि, राजनीति, संस्कृति, साहित्य, कला, वाणिज्य, व्यापार, वैंक, विज्ञान, परिवार, समाज, समस्या चाहे किसी भी विषय पर अपना प्रसारण कर सकते हैं । है ना प्रौद्योगिकी में सकारात्मक और प्रजातांत्रिक स्वतंत्रता की पहल। मनोरंजन का मनोरंजन और मेहनती हों तो विज्ञापन से कमाई भी । नाम भी होगा और पुरस्कार भी मिलेगा जैसे अपनी स्थापना के कुछ ही दिनों के भीतर सिएटल के समाचार प्रसारक Kiro को उसके निजी इंटरनेट रेडियो www.kiro710.com में समाचार रिपोर्टिंग के लिए पुरस्कार मिलने शुरु हो गये थे । कहा जाता है अब तो उन्हें कितने ही पुरस्कार मिल चुके हैं । जाते-जाते हम आपको एक और वेबसाइट का यूआरएल दिये जाते हैं चाहें तो आप यहाँ मुफ्त में केवल पंजीकृत होकर अपना इंटरनेट रेडियो घर से संचालित कर सकते हैं । सचमुच तैयार हैं तो यह लीजिए - www.shoutcast.com
जयप्रकाश मानस
संपादक
www.srijangatha.com
E-mail:srijangatha@gmail.com

5 comments:

ड़ा प्रभात टन्डन said...

बहुत ही उपयोगी जनकारी दी है, आपने, धन्यवाद्। अब तो इन्टर्नेट पर रेडियो प्रसारण सुनने की इच्छा और भी बढ गयी है।

Raman Kaul said...

उपयोगी जनकारी है। इंटरने पर खोज करने पर मेरा अनुभव भी कुछ ऐसा ही रहा था। यह दो प्रविष्टियाँ देखें
http://www.kaulonline.com/chittha/?p=91
http://www.kaulonline.com/chittha/?p=96

Debashish said...

Bahut kaam ki jaankaari di hai aapne. Shukriya :)

श्रीश । ई-पंडित said...

बहुत उपयोगी जानकारी जयप्रकाश जी। लगता है अक्षर Bold करने का बटन दबा रह गया था। फायरफॉक्स में पोस्ट के निचले हिस्से का टेक्स्ट बहुत वीभत्स नजर आ रहा है।

कमल शर्मा said...

बेहद उपयोगी जानकारी। इसे पढ़कर मन करता है कि आज ही अपना भी रेडियो स्‍टेशन शुरु कर दूं। आपने जो तकनीकी ज्ञान दिया वह अनेक के लिए फायदेमंद होगा, ऐसी उम्‍मीद है।