Wednesday, August 30, 2006

इंटरनेट के पृष्ठों पर राज करती हिंदी

एक शोध आलेखः-

वे दिन अब लद चुके हैं, जब हम किसी सायबर कैफे में बैठे-बैठे मातृभाषा हिंदी की कोई बेबसाइट ढ़ूंढते रह जाते थे; और तब कोई साइट तो दूर जगत्-जाल यानी इंटरनेट पर हिंदी की दो-चार पंक्तियाँ पढ़ पाने की साध भी पूरी नहीं हो पाती थी । अब जगत्-जाल पर हिंदी की दुनिया दिन-प्रतिदिन समृद्ध होती जा रही है । हिंदीप्रेमियों की लगभग शिकायतें अब दूर हो चुकी हैं - वह घर में बैठे-बैठे हिंदी में ई-मेल कर सकता है, दूर देश में बस गये किसी आत्मीय-जन से घंटों हिंदी में वार्तालाप (चैटिंग) कर सकता है, रोज़ हिंदी के दैनिक समाचार पत्र बाँच सकता है, अपने प्रिय विधा की रचनाओं का आनंद आनलाईन साहित्यिक पत्रिका से ले सकता है, नियमित और पेशेवर स्तम्भ लेखक की तरह इंटरनेट पर मुफ़्त जगह (स्पेस) और मुफ़्त के औजारों का फायदा उठाकर हिंदी में स्वयं को अभिव्यक्त कर सकता है, लघुपत्रिका संचालित कर सारे विश्व में बतौर संपादक नाम कमा सकता है। चाहे तो अपनी संपूर्ण किताब या सर्जना को विश्वजाल पर प्रतिष्ठित कर सकता है । इतना ही नहीं रोजगार, शिक्षा, कैरियर, चिकित्सा, योग, इतिहास आदि किसी भी विषय की जानकारी पलक झपकते ही ले और दे सकता है । और यही नहीं, कभी भी समान रुचि वाले सैकड़ों मित्रों के साथ किसी प्रासंगिक मुद्दे पर एक दूसरे को लाईव देख-सुन सकता है यानी विचार-विमर्श कर सकता है । उदाहरण बतौर एक साथ कई देश के कवि अपनी-अपनी कविताओं के सस्वर पाठ का लुत्फ़ उठा सकते हैं, वह भी एक दूसरे को देखते-निहारते हुए । सुखद सत्य तो यह है कि हिंदी ने कंप्यूटर के क्षेत्र में अंग्रेजी क़ा वर्चस्व तोड ड़ाला है और हिंदीभाषी कंप्यूटर का (इंटरनेट का भी) प्रयोग अपनी भाषा में कर सकता हैं, वह भी अंगरेज़ी भाषा में दक्ष हुए बगैर। बावजूद इसके भारत में हिंदी कम्प्यूटिंग और इंटरनेट की दुनिया का एक सच यह भी है इन उपलब्धियों का लोकव्यापीकरण भारत में अभी प्रतीक्षित है ।

जन-जन को जोड़ती भारतीय भाषा प्रौद्योगिकी-

यह सच है कि कुछ ही वर्ष पहले तक आम हिंदीभाषी भी इस जुमले को दोहराता फिरता था कि हिंदी सहित स्थानीय भाषाओं में काम करने के लिए सॉफ्टवेयर का अभाव है । पर पिछले कई सालों के सतत् प्रौद्योगिक विकास से आजकल किसी भी साक्षर को कंप्यूटर में हिंदी में अपना काम निपटाते देखा जा सकता है । माइक्रोसॉफ्ट और रैडहैट जैसी सॉफ्टवेयर कंपनियों ने अंगरेज़ी की अनिवार्यता को निरस्त करने का पर्याप्त अवसर मुहैया करा दिया है । हिंदी कंप्यूटिंग अब किसी अंगरेज़ी जैसी विदेशी भाषा की दासी नहीं रही । माइक्रोसॉप्ट के एम.एस. ऑफिस के बारे में अब हर कोई जानता है । विंडोज तथा लिनक्स जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम का इंटरफेस भी हिंदी में बन चुका है । केन्द्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार की इकाई सीडॉक (सेंटर फॉर डवलपमेंट आफ एडवांस कंप्यूटिंग) द्वारा एक अरब से भी अधिक बहुभाषी भारतवासियों को एक सूत्र में पिरोने और परस्पर समीप लाने में अहम् भूमिका निभायी जाती रही है । भाषा तकनीक में विकसित उपकरणों को जनसामान्य तक पहुँचाने हेतु बकायदा www.ildc.gov.in तथा www.ildc.in वेबसाइटों के द्वारा व्यवस्था की गई है जिसके द्वारा टू टाइप हिंदी फ़ॉन्ट(ड्रायवर सहित), ट्रू टाइप फॉन्ट के लिए बहुफॉन्ट की-बोर्ड इंजन, यूनिकोड समर्थित ओपन टाइप फॉन्ट, यूनिकोड समर्थित की-बोर्ड फॉन्ट, कोड परिवर्तक, वर्तनी संशोधक, भारतीय ओपन ऑफिस का हिन्दी भाषा संस्करण, मल्टी प्रोटोकॉल हिंदी मैसेंजर, कोलम्बा - हिन्दी में ई-मेल क्लायंट, हिंदी ओसीआर, अंग्रेजी-हिन्दी शब्दकोश, फायर- फॉक्स ब्राउजर, ट्रांसलिटरेशन, हिन्दी एवं अंग्रेजी के लिए आसान टंकण प्रशिक्षक, एकीकृत शब्द-संसाधक, वर्तनी संशोधक और हिंदी पाठ कॉर्पोरा जेसे महत्वपूर्ण उपकरण एवं सेवा मुफ़्त उपलब्ध करायी जा रही है । जहाँ मंत्रालय के वेबसाइट पर लाग आन करके सीडी मुफ़्त में बुलवाई जा सकती है वहाँ इन में से वांछित एप्लीकेशन या सॉफ्टवेयर डाउनलोड भी की जा सकती है ।

20 जून 2005 से विभिन्न भाषा-भाषियों को सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में मदद के लिए सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सी-डैक, भारत सरकार द्वारा मुफ्त वितरित हो रही इस सीडी और आन लाइन वितरण पैक में हिन्दी भाषा में वेबसाइट बनाने के सभी औजार शामिल हैं। फिर भी मंत्रालय द्वारा यदि इन विविध फ़ॉन्ट्स को उपयोगकर्ताओं में मुफ्त वितरित कराने के साथ-साथ सीधे कंप्यूटर निर्माताओं को भी उपलब्ध करा दिया जाय, और उसे अनिवार्यतः निर्माताओं द्वारा कंप्यूटरों में डलवाया जाय तो कम समय में सारे देश में हिंदी (सहित अन्य स्थानीय भाषाओं के भी) के फ़ॉन्ट पहले से ही हर पीसी में उपलब्ध हो सकता है । अर्थात् हर भाषा का एक फ़ॉन्ट ऐसा हो जो सभी कंप्यूटरों में अनिवार्यतः उपलब्ध हो । तकनीकि भाषा में इस फ़ॉन्ट को यूनिकोड पर ढ़ला होना भी चाहिए, ताकि समय की माँग के अनुसार सारे के सारे उस वांछित भाषा में काम कर सकें । ठीक उसी तरह जिस तरह दुनिया के सभी कंप्यूटरों में अंगरेज़ी का यूनिकोड पैमाना है ।

अंगरेज़ी का एक मानक की-बोर्ड है । भारतीय भाषाओं में यह अराजकता के स्तर पर है । फ़ॉन्ट की मानकीकरण के साथ-साथ हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं के की-बोर्ड का भी मानकीकरण किया जा सकता है । इस संदर्भ में यह कहना अप्रासंगिक नहीं होगा - 1999 में करुणानिधि सरकार ने तमिल भाषा के की-बोर्ड का मानकीकरण किया था । हिंदी के लिए ऐसा कर गुजरना असंभव नही होगा । आखिर इससे पहले टाइपराइटर के की-बोर्ड का मानकीकरण तो हो ही चुका है । आखिर कंप्यूटर उसी का तो विस्तार है । अखिल भारतीय स्तर पर ऐसा हो सका तो भारत में आई टी का फैलाव कई गुना बढ़ सकता है ।

इन दिनों हिंदी सहित भारतीय भाषाओं में फ़ॉन्ट की समस्या से निजात पाने की दिशा में सरकारी महकमें के साथ-साथ निजी क्षेत्र, दोनों स्तर पर तेज गति से प्रयास हो रहा हैं । माइक्रोसॉफ्ट यूनिकोड आधारित नये फ़ॉन्ट मंगल को विंडोज़-एक्स.पी. आपरेटिंग सिस्टम के साथ उपलब्ध करा रहा है, जो एम.एस. आफिस में सफल है तथा जिसमें विश्व के कई देश के हिंदी साइट बन रहे हैं । हिंदी के अधिकांश बेवसाइट संचालनकर्ताओं और चिट्ठेकारों द्वारा इसी यूनिकोड फ़ॉन्ट का उपयोग किया जा रहा है । माइक्रोसॉफ्ट ने भाषा इंडिया नामक एक विशेष परियोजना भी शुरू की है जिससे हिंदी समेत सभी भारतीय भाषाओं की लगभग तमाम समस्याओं को हल करने का प्रयास किया जा रहा है तथा हिंदी के माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी के विकास के लिए व्यक्तिगत प्रयासों और अनुप्रयोगकर्ताओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है ।

हाल ही में व्यक्तिगत प्रयासों से वर्तनी जांच की क्षमता युक्त ‘मुफ्त हिंदी लेखक’ हमारे सामने आया है जो आफिस एक्सपी में भी सफल है । यह विंडोज़ के किसी भी संस्करण में सीधे ही फ़ॉनेटिक हिंदी में टाइप की सुविधा से लैश है । यद्यपि इस हिंदी लेखक की वर्तनी जांच क्षमता (हिंदी के 60 हजार शब्द शामिल) हिंदी की व्यापकता को देखते हुए अत्यल्प है । तथापि जनसाधारण या आम उपभोक्ता को इससे लाभ और सुविधा ही होगी । वैसे भी माइक्रोसॉफ्ट हिंदी ऑफ़िस हिंदी में संयुक्ताक्षरों या बहुवचनों में वर्तनी जांच के समय सही वर्तनी वाले शब्दों को भी यह ग़लत बताता है ।

इंटरनेट/कम्प्यूटर को हिन्दीकृत करने के कुछ सार्थक व्यक्तिगत प्रयास-

इंटरनेट ने तमाम विश्व की सीमाएँ तोड़ दी हैं. अगर आपके पास इंटरनेट से जुड़ा कम्प्यूटर है तो आपको इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आप किसी गांव देहात के कस्बे में हैं या किसी महानगर में. मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे, गंज बसौदा के रहने वाले
जगदीप सिंग डांगी ने अपने व्यक्तिगत प्रयासों से हिन्दी भाषा में ब्राउज़र ही बना डाला जिसमें हिन्दी अंग्रेजी शब्दकोश भी है और हिन्दी वर्तनी जाँचक भी. रतलाम के रहने वाले रविशंकर श्रीवास्तव ने लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के तमाम, एक हजार से अधिक अनुप्रयोगों के हिन्दी अनुवाद कर डाले जिसके फलस्वरूप रेडहैट जैसी कंपनियों के द्वारा संपूर्ण लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम हिन्दी भाषा में जारी किया जा चुका है. जामनगर में रहते हुए ही स्व. श्री धनंजय शर्मा ने मेनड्रेक लिनक्स की नियंत्रक फ़ाइलों के अलावा ऑपेरा ब्राउज़र, पो-एडिट, डब्ल्यूएक्स-विंडोज़, हेलिक्सप्लेयर, रीयल प्लेयर, एक्सएमएमएस इत्यादि अनुप्रयोगों के हिन्दी स्थानीयकरण का कार्य किया था. आज तो स्थिति यह है कि हिन्दी का प्रत्येक कम्प्यूटर जानकार अपने स्तर पर हिन्दी के लिए कुछ न कुछ कर गुजरना चाहता है । बैंगलोर के आलोक, अमरीका के पंकज नरूला व रमण कौल, पूना के देबाशीश चक्रवर्ती, दुबई के जीतेन्द्र चौधरी इत्यादि अपने-अपने स्तरों पर इंटरनेट पर हिन्दी को समृद्ध बनाने में अनवरत् लगे हुए हैं । उधर छत्तीसगढ़ की एक सांस्कृतिक संगठन सृजन-सम्मान द्वारा अंतरजाल पर हिंदी की प्रतिष्ठा के लिए एक अभियान छेड़ा गया है जिसमें विद्यार्थी, बुद्धिजीवी, साहित्यकार को इंटरनेट पर हिंदी के उपयोग के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है । संगठन द्वारा साहित्यकारों की किताबों को इंटरनेट पर प्रतिष्ठित करने का जनव्यापी कार्य भी अपने हाथों में लिया गया है ।

हिंदी टाइप करने के कुछ अच्छे ऑनलाइन औज़ार -

अब तक यूनिकोड हिंदी में टाइप करने के लिए सिर्फ़ इनस्क्रिप्ट कुंजीपट ही मौजूद था¸ जो विंडोज़ एक्सपी या लिनक्स के नये संस्करणों में संस्थापित करने के बाद प्रयोग में लाया जा सकता था। वैकल्पिक तौर पर इन दिनों बहुत से ऑफलाइन तथा ऑनलाइन औज़ारों की रचना विविध स्तरों पर की गई। आज अंतरजाल पर यूनिकोड हिंदी में टाइप करने के कई अच्छे ऑनलाइन उपकरण उपलब्ध हो चुके हैं। हिंदिनी के नये हग-2 औज़ार में टाइनी-एमसीई का इम्प्लीमेंटेशन इसके हिंदी अनुवाद के साथ किया गया है जिससे हिंदी पाठ को एचटीएमएल में सजाया-संवारा भी जा सकता है। इसमें .फोनेटिक हिंदी कुंजीपट विकल्प है। इस श्रृंखला में ऑनलाइन कुंजीपट सोर्सफ़ोर्ज, गेट2होम साइट पर आप हिंदी समेत विश्व की तमाम लोकप्रिय भाषाओं में ऑनलाइन टाइप कर सकते हैं।

हिंदी में मेल करना हुआ आसान
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एमएसएन के हॉट मेल, बेबदुनिया के
ई-पत्र और गूगल के जी-मेल में हिंदी भाषा में टाइप कर के संदेश भेजना बिलकुल सरल है । इसमें हॉटमेंल 25 एमबी एवं गूगल 2 जीबी का मुफ्त स्पेस उपलब्ध कराता है । इसमें से गूगल के जी-मेल का रजिस्ट्रेशन बिना किसी की अनुशंसा से संभव नहीं है । इसके अलावा रसिक मेल – जहाँ रोमन लिपि में लिखा जा सकता है, और देवनागरी में विपत्र भेजा जा सकता है। सब विकल्प अंगरेज़ी में हैं लेकिन हिन्दी में विपत्र लिखे जा सकते हैं। इसके अलावा लंगू.कॉम के माध्यम से हिन्दी में विपत्र (ईमेल), भेजा जा सकता है । यहाँ किसी विशेष मुद्रलिपि की ज़रूरत भी नहीं है। इसके अलावा भी कई ऐसे मेल सर्विस है जिसके माध्यम से हिंदी में लिखकर ई-मेल भेजे और पढे जा सकते हैं ।

इंटरनेट भारतीय भाषाओं की फ़ॉन्ट की समस्या से मुक्त
जी हाँ, इंटरनेट के नियमित उपयोगकर्ताओं के लिए यह खुशखबरी है कि अब उन्हें हिंदी सहित भारतीय परिवार की अन्य मुख्य भाषाओं को पढ़ने के लिए फ़ॉन्ट विशेष के चक्कर में निराश नहीं होना पड़ेगा । अब भिन्न-भिन्न जाति के फ़ॉन्ट को अपने कंप्यूटर में इंस्टाल करने की बाध्यता समाप्त ही समझिए । भाषा विशेष की कोई भी एक यूनिकोड फ़ोंट अपने पीसी में संधारित कीजिए और सर्फिंग पर सर्फिंग करते चले जाइये। कहने का मतलब यह कि एक यूनिकोड हिंदी फ़ॉन्ट मंगल या रघु के सहारे आप बीबीसीहिंदी, बेवदुनिया¸ नई दुनिया¸ आदि इत्यादि सभी हिंदी साइटों का रस ले सकते हैं। इस हेतु बहु प्रचलित ब्राउज़र मॉज़िल्ला फ़ॉयरफ़ॉक्स को उसके पद्मा एक्सटेंशन सहित इस्तेमाल करना होगा.

हिंदी में खुलते चर्चा-परिचर्चा के द्वार

अब तक हिंदीभाषी नेट उपभोक्ता याहू, एमएसएन,नेटस्केप आदि द्वारा उपलब्ध करायी जा रही सुविधा का फायदा उठाकर किसी समूह की सदस्यता मात्र ई-मेल के सहारे ग्रहण कर संबंधित या वांछित विषय पर आनलाइन चर्चा, गपशप (रोमन में टंकित)कर सकते थे ।
याहू गुट : विश्वभाषा - हिन्दी भाषा, साहित्य और फ़िल्मों के विषय में चर्चा करने के लिये मञ्च। इसी तरह एक अन्य फोरम याहू गुट : हिन्दी फ़ोरम के नाम से अधिक प्रसिद्ध है । किन्तु यहाँ चर्चा के लिये रोमन लिपि का प्रयोग होता है। गूगल टॉक के आगमन से रोमन की बाध्यता जाती रही और हिंदी में लिखकर बातचीत करने का सुनहरा दौर प्रारंभ हो चुका है । यथा(जैसे चिट्ठाकार समूह) । अब हाल ही में हिंदी फोरम ‘परिचर्चा’ की शुभ शुरुआत से हिंदी में किसी खास मुद्दे पर आनलाइन बाचतीत करके जानकारी संग्रहण, विचार-विमर्श का नया द्वार खुला है । जिसमें कोई भी व्यक्ति जाति, लिंग, वर्ण, स्थान के शर्त के बगैर सम्मिलित हो सकता है । इसका उपयोग सकारात्मक दृष्टि से करें तो आनलाइन देशी-विदेशी भाषा शिक्षण जैसे अनेक गंभीर विषयो में भी किया जा सकता है।


आनलाइन हिंदी साहित्य की सौगात-

इंटरनेट एक ऐसा स्थान है, जहां किसी भी विषय से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है। हिन्दी दुनिया की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली तीसरी भाषा है, इस दृष्टिकोण से हिंदी भाषा में इंटरनेट पर बहुत कम सामग्री उपलब्ध हैं पर आनलाइन हिंदी के रूप में अब तक काफी सामग्री जगत्-जाल पर उपलब्ध हो चुकी है । जो भारतीय कला, साहित्य एवं संस्कृति, धर्म आदि पर अभिकेंद्रित किताबें पढ़ना चाहते हैं उनके लिए भारत की बेबसाइट साइट (http://vrhad.com)महत्वपूर्ण जाल स्थल है जहाँ हिंदी साहित्य की लगभग सभी विधाओं की प्रसिद्ध किताबों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है । क्रयादेश देकर किताबें घर बैठे भी मंगवाई जा सकती हैं । यहाँ तुलसी दास रचित दोहावली, कवितावली एवं श्रीभद्भगवतगीता सहित कुछ अन्य किताबें मुफ्त में पढ़ी एवं डाउनलोड़ भी की जा सकती है । आजकल अपने देश में भी, इन्टरनेट पर बहुत सारे पुस्तकों के स्टोर खुल गये हैं। जो अच्छे हैं और भरोसे मन्द भी। मैं इनमे से एक http://www.firstandsecond.com/ से किताबें मंगवाता हूं। आप कहीं भी हों किताबें अपने देश के किसी इन्टरनेट बुक स्टोर से मंगवा सकते हैं। यहां भी आप मेनू पर ढ़ूढ़ सकते हैं।


सी-डैकचलपुस्तकालय (mobilelibrary.cdacnoida.com)सीडॅक नॉयडा का अधिकारिक स्थल हैं। यहाँ पर कुछ वेदों के अलावा गिजुभाई बधेका, चौधरी शिवनाथ सिंह शाण्डिल्य, प्रेमचन्द, यशपाल जैन, शिवानन्द तथा अन्य लेखकों की लिखी कई साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक आदि विषयों की मुफ्त पुस्तकें हिन्दी व अंग्रेज़ी में उपलब्ध हैं। इंडिया एन इंडियन डॉट कॉम में आप यूनिकोड फ़ॉन्ट में मुंशी प्रेमचंद, अमीर खुसरो, कबीर, तुलसीदास, साहिर लुधियानवी अ‍ादि की रचनाओं का आनंद ले सकते हैं। विवेकानंद के व्‍याख्‍यान, श्रीमद् भागवत गीता, हनुमान चालीसा, आरती और भजन संग्रह आदि भी इंटरनेट पर हैं।आचार्य नागार्जुनकृत सुहृल्लेख ग्रन्थ का भोट देश में बहुत अधिक प्रचलन है। विशेषकर शास्त्रों का अध्ययन न करने वाले गृहस्थ एवं सरकारी अधिकारियों में यह काफी लोकप्रिय रहा है। इसी कारण तिब्बत में इस ग्रन्थ के ऊपर अनेकों भोट आचार्यों ने टीका-टिप्पणियाँ लिखी हैं। फलस्वरूप आजकल भारत में समस्त केन्द्रीय तिब्बती स्कूलों के पाठ्यक्रम में इस ग्रंथ का अध्यापन हो रहा है। केन्द्रीय बौद्ध विद्या संस्थान, लदाख के पाठ्यक्रम में भी इस ग्रन्थ को रखा गया है। साहित्य संग्रह में मीरा, कबीर, प्रेमचन्द, जैसे भारतीय साहित्य के कई शलाका पुरुषो की हिंदी रचनाए हैं। वेबदुनिया साहित्य - हिन्दी साहित्य का महा जालस्थल है। मल्हार में हिन्दी और उर्दू लेखों, कहानियों (प्रेमचन्द की) और ग़ज़लों का अद्भूत संग्रह है । कविताएँ और उपन्यास वह जालस्थल है जहाँ- अश्विनी कपूर, सफ़दर हाशिमी और स्वर्गीय सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताओं, लेखों, उपन्यासों इत्यादि का संग्रह हैं। भारतीय और अमेरिका-वासी मित्रों द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित आधुनिक हिन्दी साहित्य को प्रेषित करने के प्रयास का नाम है- अन्यथा । यहाँ समकालीन कविता, सहित्य, कहानियों और आलोचना का आनंद उठाया जा सकता है। संपूर्ण जगत्-जाल पर ललित निबंधों का एक मात्र संग्रह स्थल है- http://jayprakashmanas.info, यहाँ हिन्दी के सभी महत्वपूर्ण ललित निबंधकारों यथा- हजारी प्रसाद द्विवेदी, विद्यानिवास मिश्र, कुबेरनाथ राय, पद्मश्री रमेशचंद्र शाह, डॉ. श्रीराम परिहार, डॉ.श्यामसुंदर दुबे, रमेश दत्त दुबे, श्रीकृष्णकुमार त्रिवेदी, डा.बल्देव, नर्मदा प्रसाद उपाध्याय, महेश अनघ, अष्टभुजा शुक्ल, डॉ.शोभाकांत झा सहित युवा ललित निबंधकार श्री जयप्रकाश मानस के ललित निबंधों को आनलाईन पढा जा सकता है । जिन्हें हाइकु का आस्वाद लेना है उन्हें हिंदी गगन डॉट कॉम से जुड़ना होगा । जगत्-जाल पर मात्र प्रौढ़ साहित्य ही नहीं यहाँ बाल साहित्य और दादा नानी की कहानियों का भी भंडार बिखरा पड़ा है । पिटारा और 4 to 40 आदि ऐसे ही जाल स्थलों के नाम हैं । बच्चों के मनोरंजन और कहानियों, कविताओं द्वारा उनका ज्ञान बढ़ाने के लिए जालस्थल बब्लू बनाया गया है। पॉपप झरोखे में हिन्दी की कड़ी है। न्यूयार्क विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग ने भी कहानियों, पत्रिका और विडियो को संग्रहित किया है इसे हम (www.nyu.edu/gsas/dept/mideast/hindi/) पर देख सकते हैं । यह सामाजिक व तकनीकि मुद्दों पर लेखों का संकलन है जो स्थल सुषा मुद्रलिपि में है। जो सामाजिक व तकनीकी मुद्दों पर लेखों को संकलित करना चाहते हैं, वे सराय का भ्रमण कर सकते हैं। यह स्थल सुषा मुद्रलिपि में है।


इस बीच इंटरनेट पर उपलब्ध हिंदी साहित्य के पठन-पाठन के प्रति लगातार वरिष्ठ और समकालीन दौर के महत्वपूर्ण रचनाकार जागरुक दिखाई देने लगे हैं । प्रिंट मीडिया यानी किताब और मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं के साथ वहाँ उनकी महत्वपूर्ण रचनाएं भी देखी जा सकती हैं । यद्यपि जालपृष्ठों के प्रति प्रिंट मीडिया में सक्रिय औसतन लेखकों का रुझान अभी स्पष्ट नहीं हो सका है जो अंतरजाल पर हिंदी के विकास की दृष्टि से आवश्यक और भाषायी वैश्वीकरण के लिए भी आवश्यक है । रचनाकारों को इस दिशा में जागरुक होना चाहिए कि यह अपने पाठक बढ़ाने या नए पाठक बनाने का एक नया ज़रिया भी है। जहाँ उनकी रचनाएं और इस बहाने वे देश और काल की जटिल सीमाओं से भी परे जा सकते हैं । हिंदी की समकालीन लेखकों का वेबपेजों पर अपनी सक्रियता को रेखांकित करना इसलिए वाछिंत नज़र आता है क्योंकि इससे समूचे विश्व को हिंदी लेखन का सर्वश्रेष्ठ भी इंटरनेट के माध्यम से हस्तगत हो सकेगा और स्तरहीनता का प्रश्न भी खडा नहीं हो सकेगा । इसका आशय यह नहीं कि अंतरजाल पर उपलब्ध हिंदी साहित्य की पूरी सामग्री को ही स्तरहीनता का शिकार मान लिया जाए । यह अलग मुद्दा हो सकता है कि शौकिया वेबसाइट के कई संपादक ऐसे हैं जिन्हें हिंदी की विधागत चरित्र का भी बुनियादी ज्ञान नहीं है। इस प्रसंग में एक निजी अनुभव का जिक्र करना अप्रासंगिक नहीं होगा - हिंदी साहित्य के एक लोकप्रिय और खास वेबसाइट (भारतीय नहीं) के संपादक मेरे आग्रह और आपत्ति जताने के बाद भी एक बहुश्रूत एवं संपूर्ण भारतीय लोककथा को लोककथा न मानते हुए उसे संबंधित लेखक की निजी रचना और प्रेरक प्रसंग ही मानते रहे । वेबपृष्ठों पर रचे जा रहे समकालीन साहित्य का मूल्याँकन अभी होना शेष है क्योंकि वहाँ किसी खास और समर्थ समीक्षक की पहुँच अब तक सुलभ नहीं हो सकी है । वेबसाइट के स्ट्रक्चर के ज्ञाता तो यहाँ बहुतायत में है पर वहाँ स्थापित होती सामग्री के टेक्सचर के वैयाकरण नहीं के बरोबर । वेब पर निरंतर स्थापित हिंदी की भाषा में यद्यपि अभी नयी प्रौद्योगिकी का वह दुष्प्रभाव दृष्टिगत नहीं हुआ है जो इन दिनों मोबाईल के एसएमएस से गुजरने से पढ़ने को मिलता है । सबसे महत्वपूर्ण तथ्य तो यह है कि यदि संख्यात्मक दृष्टिकोण से परखें तो इंटरनेट पर विदेशियों या प्रवासी लेखकों द्वारा रचे जा रहे साहित्य के नये आयामों, अनुभवो, प्रतीको, समकालीन प्रवृति और दशा के मूल्याँकन का समय अब आ चुका है । अभी हिंदी के नामवर आलोचक समीक्षा कर्म के दौरान इंटरनेट पर हो रहे लेखन को बिलकुल बिसार देते हैं । कहीं यह अदेखे और महत्वपूर्ण साहित्य लेखन के प्रति अन्याय और उपेक्षा-भाव तो सिद्ध नहीं हो रहा ? यह भी विचारणीय मुद्दा हो सकता है । क्योंकि वहाँ रचे जा रहे साहित्य और हिंदी का बहुलांश ऐसे रचनाकारों की रचनात्मकता का प्रतिफल है जो हिंदी की वरिष्ठ पीढ़ी की सानिध्यता या समीप-भाव से वंचित हैं या विलग हैं । खासकर विदेशी ज़मीन पर रहने के बावजूद मातृभाषा हिंदी के प्रति श्रद्धाभाव रखने वाले सृजनात्मकता को सतत् बनाये रखने वाले सृजनधर्मी ।
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जगत्-जाल पर हिंदी पत्र-पत्रिकाओं का फैलता साम्राज्य-

इंटरनेट में हिंदी साहित्य के हजारों पृष्ठ ही नहीं अपितु अनेक नियतकालीन पत्र-पत्रिकाएँ भी सुव्यवस्थित ढ़ंग से प्रकाशित हो रही है । सच तो यह है कि इन्हीं पत्र-पत्रिकाओं के सहारे विदेशों में बसे भारतीय पाठकों को लगातार भारतीय साहित्य मिल पा रहा है । इसमें सबसे महत्वपूर्ण है –
अभिव्यक्ति एवं अनुभूति। इंटरनेट पर हिंदी साहित्य की सबसे बड़ी और एकमात्र इस साप्ताहिक पत्रिका का संचालन पूर्णिमा वर्मन के दिशाबोध में चार विभिन्न देशों के चार तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है । बेबदुनिया(हिंदी की प्रथम जालस्थल)उद्गम, तद्भव पत्रिका, ताप्तिलोक, भारत दर्शन (न्यूज़ीलैंड से प्रकाशित), वागार्थ, हंस, अट्टहास, शब्दांजलि, साहित्य कुञ्ज, हिन्दी नेस्ट,हिन्दीसेवा.कॉम, कलायन पत्रिका, छाया, मधुमती, साहित्य अमृत, हिन्दी इलेक्ट्रौनिक साहित्य मैगज़ीन , रचनाकार , कृत्या (कविता की मासिक पत्रिका)आदि वे अन्य आनलाइन पत्रिका हैं जिसमें हिंदी पाठकों के लिए हिंदी साह्त्यि की विभिन्न विधाओं की सामग्री नियमित रूप से परोसी जा रही है । इसमें से कई साइटों के प्रबंधन द्वारा प्रकाशन हेतु पर्याप्त आमंत्रण के बावजूद तथाकथित हिंदी के चर्चित एवं महत्वपूर्ण साहित्यकारों की रचनाओं का टोटा है । सृजनगाथा छत्तीसगढ़ की एकमात्र आनलाइन साहित्यिक पत्रिका है, जो कुछ ही महीनों में 20 से अधिक देशों में लोकप्रिय हो चुका है । इस साइट की सबसे बड़ी विशेषता है दुनिया के सबसे कम उम्र (13 वर्ष)के बालक प्रशांत रथ द्वारा डिजायन किया जाना । इस साइट में देश विदेश के रचनाकारों की सभी विधाओं की रचनाएँ प्रकाशित की जा रही है । विश्व की पहली हिन्दी ब्लॉगज़ीन , निरंतर है जहाँ साहित्यिक एवं समसामयिक विषयों की रचनाए प्रकाशित की जाती हैं ।

साहित्यिक गलियारों में इसे हिंदी की विडंबना निरुपित की जाती रही है कि हिंदी के वरिष्ठ से वरिष्ठ साहित्यकार विदेश में नहीं पढ़े जाते । इन्हें प्रवासी भारतीय और वहाँ के हिंदी सेवी या साहित्यकार भी ठीक से नहीं जानते । प्रिंट मीड़िया की सर्वसुलभता, डाक की व्यापकता के बावजूद कोई भी हिंदी का लेखक अपने समय में दुनिया भर में नहीं पढ़ा जा सकता । हिंदी पट्टी का यह मिथक भी अब टूटता नज़र आ रहा है । सच्चे अर्थों में इंटरनेट और वहाँ संचालित ई-पत्रिकाओं के कारण रचनाकारों की अभिव्यक्ति को वैश्विक मंच मिलने लगा है । इंटरनेट ने व्यक्तिगत तौर पर भी हिंदी के साहित्यकारों को विश्वव्यापी बना दिया है । कल तक जिस रचनाकार के पाठक उसके पास-पड़ोस या एक सीमित क्षेत्र में पाये जाते थे अब उसे विश्व के कई देशों के जागरुक और गंभीर पाठकों से नियमित प्रतिक्रिया भी मिलती है । इस विश्वव्यापी माध्यम की व्यापकताओं को समझकर अब कई साहित्यकार नेट पर निजी बेबसाइट या आई.टी.बेस्ड बड़ी कंपनियों द्वारा मुफ्त उपलब्ध स्पेस (ब्लाग)पर स्वयं को अभिव्यक्त करने लगे हैं । इस कार्य में एम.एस.एन के माय स्पेस, याहू के जियोसिटीज, गुगल के ब्लागर डॉट कॉम तथा वर्डप्रेस आदि ने हिंदी के नये एवं पुराने लेखकों को भी काफी प्रोत्साहित किया है । इस अनुक्रम में हम हिंदी के प्रख्यात रचनाकारों सहित उन नये पुराने साहित्यकारों की व्यक्तिगत साइट का भी उल्लेख कर सकते हैं जिनमें से कुछ फ्री-स्पेस के जालडायरी पर स्थापित हैं । इनमें नरेन्द्र कोहली,
अशोक चक्रधर, आलोक की शायरी , आसान रास्ते (विक्रम मुरारका की कविता), उज्ज्वल भट्टाचार्य, एक अदहन हमारे अंदर और भग्न नीड़ के आर-पार (दोनों कवि अभिज्ञात की कविताओं का एक संग्रह), एस के भण्डारी, काव्य मंजूषा (स्वप्न मंजूषा शैल की हिन्दी काव्य रचनाओं का संग्रह), कैफ़ी आज़मी , तरकश, ( जावेद अख्तर की ग़ज़लों का संग्रह), धर्मवीर भारती , प्रधानमंत्री की रचनाएँ (श्री अटल बिहारी वाजपेयी की, मधुशाला (श्री हरिवंश राय बच्चन की यह प्रसिद्ध कविता ) मेरी कविताएँ (पूर्णिमा वर्मन् की व्यक्तिगत हिन्दी रचनाएँ।), मोहन राणा की कविताएँ ( हिन्दी कविता की नई पीढ़ी में मोहन राणा की कविता) रविशंकर श्रीवास्तव की हिन्दी ग़ज़लें , राज की कवितायें , शज़र बोलता है (शज़र द्वारा कविताओं का संग्रह), सहस्र धारा (दुष्यन्त कुमार, अज्ञेय, मुक्तिबोध, नेमीचन्द्र, भवानीप्रसाद मिश्र, हरिनारायण व्यास, रघुवीर सहाय, शकुन्त माथुर व शमशेर बहादुर सिंह की कुछ कविताओं का रोमन लिपिबद्ध संग्रह), हिन्दी की कविताएँ (सत्येश भंडारी), अनकही बातें सारिका सक्सेना अशोक आधुनिक कविताएँ (हरिवंशराय बच्चन, राकेश कौषिक, महादेवी वर्मा द्वारा लिखी कविताएँ।"HINDI" नामक कड़ी के नीचे इनकी कड़ियाँ उपलब्ध हैं), नर्मदाप्रसाद मालवीय , भास्कर तैलंग , जयप्रकाश मानस, सुकेश साहनी(स्वंय एवं अन्य नामचीन लघुकथाकारों की रचनाओं का संग्रह स्थल) रोशन कामथ की उर्दू रचनाएँ ,आदि साइट या ब्लाग प्रमुख हैं । इसके अमीर ख़ुसरो के हिन्दी दोहे ख़ुसरो के दोहों का संग्रह। गीता अमृत (सुदर्शन कुमार गोयल द्वारा हिन्दी में कविता रूप में अनुदित गीता के कुछ श्लोक), टैगोर की रचनाएँ मीरा , वन्दे मातरम् बंकिम चंद्र चटर्जी का लिखा देशभक्ति का गीत। शायरी (उर्दू शायरी और हिन्दी कविताओं का संग्रह। हिन्दी में श्रीरामचरितमानस भी उपलब्ध है)विनय का हिन्दी उर्दू काव्य पृष्ठ , ईबज़्म (हिन्दी व उर्दू काव्य,यह जालस्थल सुषा मुद्रलिपि का प्रयोग करता है) दक्षिण एशियायी महिला गोष्ठी (इस अंतरजाल गोष्ठी में अपनी हिन्दी काव्य रचनाओं को प्रस्तुत किया जा सकता है और औरों की रचनाएँ पढ़ी जा सकती हैं) का भी जिक्र समीचीन होगा ।

अखबार अब नेट की ओर-

नई सूचना प्रौद्योगिकी और वेब तकनीक को देश के बड़े अखबार वालों ने जल्दी अपनाया। आज हम देश-विदेश की कई हिंदी दैनिकों को घर बैठे पढ़ सकते हैं । इनमें अमर उजाला , अमेरिका की आवाज़ (वायस औफ़ अमेरिका) आगरा न्यूज़ , आज, आज तक , इरान समाचार , ई ऍम ऍस इण्डिया (समाचारपत्रों को बहुभाषीय समाचार सेवा प्रदान करने वाला स्थल), उत्तराँचल टाइम्स, एक्सप्रेस न्यूज़, ख़ास ख़बर, जन समाचार(भारतीय व भारतीय ग्रामीण मुद्दों से सम्बन्धित समाचार पत्र), डियूश वेल्ल (जर्मन रेडियो द्वारा प्रसारित हिन्दी कार्यक्रम) पाञ्चजन्य, इंडिया टुडे, डेली हिन्दी मिलाप, द गुजरात, दैनिक जागरण , दैनिक जागरण ई-पेपर , दैनिक भास्कर , नई दुनिया - नव भारत अखबार, नवभारत टाइम्स, पंजाब केसरी, प्रभा साक्षी, प्रभात खबर, बी.बी.सी. हिन्दी खबरें - यूनीवार्ता, राजस्थान पत्रिका, राष्ट्रीय सहारा, रीडिफ़.कॉम, रेडियो चाइना ऑन्लाइन, लोकतेज , लोकवार्ता समाचार, वाह मीडिया(सनसनी पैदा करने वाले भारतीय मीडिया पर चुटकी लेने के लिए बनाया गया हल्का-फुल्का जालस्थल), विजय द्वार, वेबदुनिया, समाचार ब्यूरो, सरस्वती पत्र (कनाडा का हिन्दी समाचार)सहारा समय, सिफ़ी हिन्दी, एम.एस.एन हिंदी, सुमनसा ( कई स्रोतों से एकत्रित हिन्दी समाचारों के शीर्षक) हरिभूमि आदि प्रमुख हैं । इन अखबारों को पढ़ने के लिए यद्यपि हिंदी के पाठक को अलग-अलग फ़ॉन्ट की आवश्यकता होती है परंतु संबंधित अखबार के साइट से उस फ़ॉन्ट विशेष को चंद मिनटों में ही मुफ्त डाउनलोड़ और इंस्टाल करने की भी सुविधा दी गई है । हिंदी फ़ॉन्ट की जटिल समस्या से हिंदी पाठकों को मुक्त करने के लिए शुरूआती समाधान के रूप में डायनामिक फ़ॉन्ट का भी प्रयोग किया जा रहा है । डायनामिक फ़ॉन्ट ऐसा फ़ॉन्ट है जिसे उपयोगकर्ता द्वारा डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं होती बल्कि संबंधित जाल-स्थल पर उपयोगकर्ता के पहुँचने से फ़ॉन्ट स्वयंमेव उसके कंप्यूटर में डाउनलोड हो जाता है । यह दीगर बात है कि उपयोगकर्ता उस फ़ॉन्ट में वहाँ टाइप नहीं कर सकता । जो भी हो, इसमें से कई ऐसे अखबार हैं जिससे जुड़कर हिंदी कंप्यूटिंग में दक्ष एवं सक्रिय पत्रकार और फोटोग्राफर मान और मानदेय दोनों अर्जित कर सकता है । वह देश एवं विदेश के बड़े ख्यातिनाम पत्रकारों से नियमित संपर्क कर अपने कौशल को भी बढ़ा सकता है । एक ऐसा ही बेवसाइट है - श्वूंग । यहाँ निःशुल्क, किसी सारांश, समीक्षा, सार, पुस्तक की चर्चा को 34 भाषाओं में पढ़ने के लिए आमंत्रित किया जाता हैं। श्वूंग साहित्य (हर प्रकार की पुस्तकें), समाचारपत्र, वेबसाइट और अकादमिक प्रसंग से कोई: दर्शनशास्त्र, इतिहास, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, नृतत्वविज्ञान, भाषा-विज्ञान, आयुर्विज्ञान, गणित, भौतिक विज्ञान, खगोलीय भौतिकी खगोलशास्त्र, जीवविज्ञान, रसायनशास्त्र, जैव-रसायनशास्‍त्र, जैव-प्रौद्योगिकी, इं‍जीनियरी, पर्यावरण, कानून, अर्थशास्त्र, व्यापार प्रबंधन और अन्य का सार प्रदान करता है। होमर और आर्कमेडिज़ से लेकर शेक्सपियर और न्यूटन से आइंस्टीन और जे के रोलिंग तक। यहाँ से अनुवाद कर पैसा कमाया जा सकता है ।

धर्म-अध्यात्म की पावनधारा-

यह कई लोगों के लिए आश्चर्य का विषय हो सकता है कि अंगरेज़ी में संचालित चर्चा समूहों (डिस्कसन ग्रुप्स)में सर्वाधिक लोग धर्म-कर्म और अध्यात्म पर चर्चा करते पाये जाते हैं । और उस पर भी अजीब यह कि उनमें से अधिकांश भारतीय अध्यात्म के महत्वपूर्ण पहलू पुनर्जन्म जैसे जटिल विषय पर विमर्श हेतु ज्यादा सतर्क और इच्छुक होते हैं। एक आश्चर्य यह भी कि औसतन हिंदीभाषी भारतीय इंटरनेट पर इन विषयों के प्रति लापरवाह नज़र आता है । फिर भी विभिन्न धर्मों, पंथों, मतो से संबंधित हिंदी साइट जगत्-जाल पर आये दिन उद्धाटित हो रहे हैं । यहाँ हिंदू धर्म के विभिन्न घटकों की साइट भी उनके अनुयायियों द्वारा सरलता से देखी जा सकती है । इन जाल स्थलों में
आर्य समाज, आर्य समाज जामनगर, (आर्य समाज के नियम, संस्थापक और ग्रन्थ जैसे ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका, सत्यार्थ प्रकाश, वेदों के भाष्य, वेदांग तथा अन्य वैदिक साहित्य भी चित्र प्रारूप में यहाँ उपलब्ध है), उपासक का आन्तरिक जीवन, (श्री राम शरणम के स्वामी सत्यानन्द की रचनाएँ), ऋषि प्रसाद (संत श्री आसाराम आश्रम द्वारा प्रकाशित यह पत्रिका अब इस जालस्थल पर भी पढ़ी जा सकती है), एकादशी व्रत , (एकादशी व्रत की कथा), ओशो अनुभव (ओशो वैबसाइट जहां आप ध्यान का अनुभव कर सकते हैं, मैडिटेशन रिज़ॉर्ट में जायें, ऑन-लाइन टैरो कार्ड का अध्ययन करें, ऑन-लाइन पत्रिका का मज़ा लें ,पुस्तकें खरीदें, ऑडियो और वीडियो खरीदें ताकि आप अपनी जीवन शैली में जागरूकता ला सकें। स्ट्रीमिंग ऑडियो और वीडियो भी यहाँ उपलब्ध हैं), ओशो पत्रिका (श्री ओशो रजनीश के प्रवचनों की पत्रिका), करवा चौथ व्रत, कल्याण आश्रम(श्री नारायण साईं जी के जीवन, संगठन, विचार, चित्रों का घर), गायत्री परिवार वाटिका,चिन्मय मिशन का हिन्दी जालस्थल(मिशन द्वारा वेदान्त ज्ञान हिन्दी भाषा में प्राप्त करने का महास्थल), चिरायु काल सर्प(फलित ज्योतिष से सम्बन्धित जानकारी) नारद भक्ति सूत्र ( स्वामी शिवोम् तीर्थ की पुस्तक परम प्रेमालोक पर आधारित), भनोट भजन संग्रह - इस पृष्ठ पर हिन्दी और अंग्रेज़ी में भजन संकलित किये गये, महादेव शिव शंकर पूजा श्लोक मंत्र - शिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम्ज्योतिर्लिंग व लघुरुद्राभिषेक, विश्व हिन्दू परिषद (विश्व हिन्दू परिषद का जालस्थल), वेदान्त सोसाइटी ऑफ़ न्यूयार्क (स्वामी विवेकानन्द द्वारा 1894 में न्यू यार्क, अमेरिका में स्थापित वेदान्त सोसाइटी का जालस्थल), श्री गीता चालीसा (श्रीमद् भगवद् गीता, हिन्दी व्याख्या सहित), श्री चैतन्य सारस्वत मठ(नवदीप धाम में स्थित श्री चैतन्य सारस्वत मठ का जालस्थल), श्री शनि धाम (श्री सिद्ध शक्ति पीठ शनि धाम का जालस्थल), श्रीराम शरणम (श्रीराम शरणम सतसंग संबंधी प्रवचन और संस्थापक के बारे में जानकारी), साईलीला – (साई बाबा पर एक हिन्दी पत्रिका), सिद्ध समुदाय(शैव पन्थ के बारे में कई भाषाओं में जानकारी), हिन्दी आरती (आरतियों का संकलन) विश्व हिंदू समाज, प्रमुख हैं, जिसे नियमित रुप से सारे विश्व में पढ़ा जा रहा है । अखिल विश्व गायत्री परिवार एक महत्वपूर्ण साइट हैं जहाँ अखण्ड ज्योतिप्रज्ञा अभियान जैसी अध्यात्म की लोकप्रिय मासिक पत्रिका सहित महापुरुषों के जीवन प्रसंग, पूज्य गुरुदेव की अमृत वाणी, इक्कीसवीं सदी-क्रान्तिधर्मी साहित्य, साधना, व्यक्ति निर्माण, युग निर्माण, आयुर्वेद, चिकित्सा, तथा स्वर्ण जयन्ती पुस्तक माला की कई किताबें को बिना किसी शुल्क के डाउनलोड कर संग्रहित किया जा सकता है ।

हिंदी गीत संगीत की महफ़िल जगह-जगह
हिंदी कंप्यूटिंग और इंटरनेट के औसतन उपयोगकर्ता जिन साइटों को बहुधा खंगालते हैं उसमें फिल्मी-संगीत का विषय कहीं आगे है । और ऐसे जाल-स्थलों की फेहरिस्त कम लंबी नहीं । हम यहाँ ऐसे जाल-स्थलों का उल्लेख समयाभाव के कारण नहीं कर रहे हैं । फिर भी आप में से कोई गीत-संगीत का विशेष दीवाना है तो उसके लिए भी कुछ विशिष्ट जाल-स्थलों का नाम बताये दे रहे हैं ।
अक्षरमाला -फ़िल्मी गाने में तीन हज़ार हिन्दी फ़िल्मी गानों का संग्रह है। गीतायन गीत के अद्याक्षर के अनुसार हिन्दी फ़िल्मी गीतों को खोजने की सुविधा देती है । यह अन्त्याक्षरी जैसे खेलों में काम आ सकता है। चलचित्र में हिन्दी फ़िल्म अमर प्रेम के बारे में जानकारी विद्यमान है । पर यह स्थल रोमन लिपि में है। फ़िल्मी गीत - लगान, कभी ख़ुशी कभी ग़म, कल हो न हो फ़िल्मों के गीतों के बोल हिन्दी और जर्मन में उपलब्ध हैं। पी डी ऍफ़ प्रारूप में। फ़िल्मी गीतों के बोल में हिन्दुस्तानी फ़िल्मी गीतों के बोल उपलब्ध है। बोल रोमन लिपि में हैं। बॉलीवुड में हिन्दी फ़िल्मों, गानों और सितारों के बारे में जानने के लिए, इस महा जालस्थल में प्रवेश कर सकते हैं । भारतीय शास्त्रीय संगीत - भारतीय शास्त्रीय संगीत के बारे में जानकारी देता है यहाँ आप थाट, राग, इत्यादि के बारे में व्यापक जानकारी प्राप्त कर सकत हैं । राग पर हिंदी में क्लासिकल, फिल्मी गीत, भजन आदि निःशुल्क व आनलाईन सुनकर भावविभोर हुआ जा सकता है ।

अंतरजाल पर हिंदी पृष्ठों को समृद्ध करते ब्लागर
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लेखन की नई तकनीक ‘ब्लाग’ का आगमन इंटरनेट पर लेखन की दिशा में क्रांतिकारी सिद्ध होने लगा है । वेब-लॉग का शॉर्ट फॉर्म है ब्लॉग, यानी एक ऑनलाइन निजी डायरी। अब इस डायरी पर आप कविता लिखें या कहानी । उपन्यास रखें या ललित निबंध । या फिर समाचार टंकित करें । खास बात यह है कि ब्लॉग पर लिखने के लिए यह जरूरी नहीं कि आप बहुत बड़े लेखक, पत्रकार, कवि या विचारक हों ही। जरूरत है तो ब्लॉग पर क्लिक करने की और बस लग जाएंगे आपके विचारों को पंख। ब्लॉग आपको अपने विचारों को पंख लगाने का मुफ्त स्पेस देते हैं। कुछ भी लिखेंगे, फीडबैक मिनटों में मिल जाता है। यानी किताब लिखने से ज्यादा फास्ट और फायदेमंद। फायदेमंद इसलिए क्योंकि यहां लिखने के लिए न तो आपको किसी पब्लिशर के चक्कर काटने पड़ेंगे और न ही किसी संपादक की कैंची का मोहताज होना पड़ेगा। अपनी पहचान को पूरी तरह छिपाते हुए आप साइबर कम्युनिटी का हिस्सा यानी ब्लॉगर बन सकते हैं । कुछ ही समय पहले हिंदी के 2-4 लेखक ही ब्लाग तकनीक का फायदा उठाकर अपनी रचनात्मकता को इंटरनेट पर प्रदर्शित कर रहे थे पर खुशी की बात है कि देखते ही देखते विगत 5-6 माह की भीतर इनकी संख्या 284 तक पहुँच चुकी है,शायद इससे भी और ज्यादा, क्योंकि प्रतिदिन कोई न कोई हिंदी प्रेमी यहाँ अपनी अभिव्यक्ति के लिए पधार रहा हैं। यानी कि हिंदी वाले भी इस दिशा में पीछे नहीं हैं ।

साहित्य, तथा हिंदी के साहित्येतर वाङमय (कला, विज्ञान, चिकित्सा, प्रौद्योगिकी, अर्थशास्त्र, दर्शनशास्त्र, खेल, सामयिक मद्दों, राजनीति, परिवार, शिक्षा पेंटिग जैसे कई विषयों) से इंटरनेट को समृद्ध करने वाले कुछ महत्वपूर्ण ब्लाग हैं-
A Journey , An Inner Voice , anandpur satsang , anoobhuti , apnidhapli , archnaakhyan , arvind das , ♥ अभिव्यक्ति ♥, अँखियों के झरोखों से , अंतरजाल पर पहला छत्तीसगढ़ी उपन्यास , अंतर्मन ,अंदाज़-ए-बयाँ और , अक्षरग्राम, अनकही बातें , अनुभूति कलश , अपनी बात, अबे कस्बाई मन! , अभिरंजन कुमार का ब्लॉग, अभिरुचि ,अभिव्यक्ति ,अरूण उवाच, अर्ज किया है ! , अल्प विराम , आइए हाथ उठाएं हम भी , आईना , आओ सीखें संस्कृत भाषा , आज का सवाल Today's Question, आलेख , इधर उधर की, इन्‍द्रधनुष , , ई-स्वामी, उडन तश्तरी, उत्तरा, उत्तरांचल, एक अनोखी दास्तान, एक और नज़रिया ..:: Anderer Standpunkt , एक दीवाना , एक मनोविचार , एक मुलाकात, एक शाम मेरे नाम , कचराघर Recycle Bin, कटिंग चाय , कतरनें (snippets), कथाओं का सिलसिला, कथक के साथ!! , कल्‍पवृक्ष , कल्पतरु , कविता सागर , कहकशां , कही अनकही , काम : एक कला, काव्यगगन( kavyagagan) , की-बोर्ड का रिटायर्ड सिपाही, कीबोर्ड के सिपाही , कुछ बतकही , कुछ बातें , कुछ मेरी भी , कुछ सच्चे मोती , कुछ सच्चे मोती , कुछ हमरी भी , कुत्ते की पूँछ , कुलबुलाहट , क्या? क्यों? कैसे? , खाली-पीली , खुशबू , गजल की दुनिया में , गपशप , गप्प-सड़ाका , गाना बजाना , गीत कलश , गुरु गोविंद , गूगल हिन्दी में , घूमते फ़िरते , चिट्ठा-ए-डिप्पी , चिठ्ठा चर्चा , चित्र कथा , चिन्तन , चुटकलों की बहार , छत्तीसगढ़ - छत्तीसगढ़ी - छत्तीसगढ़िया, छाया, छाया (shadow), छींटे और बौछारें , छुट-पुट , जयप्रकाश मानस , जर्मन सीखो , जलते हुए मुद्दे , जलेबीBurger , , जी हाँ , जीतू की कलम से , जीवन के रंग , जुगलबन्दी.. , जुगाड़ी लिंकCool Links , जो देखा भूलने से पहले : मोहन राणा : Mohan Rana , जो न कह सके , जोगलिखी , ज्ञान-विज्ञान , झरोखा , टेकनोलोजी का तत्वज्ञान , टोने टोटके , ठलुआ , ठेले पे हिमालय , डॉ॰ जगदीश व्योम , , तत्वज्ञानी के हथौडे , तिरछी नजरिया , तिरछी नजरिया , दरिया , दर्पण।The Mirror , दस्तक , दिल की बात … दिल से . .(Hindi Blog) ,दिल्ली ब्लॉग , देखले भाई Look it , देश-दुनिया , दैनन्दिनी , धीरु भाई , नई हवा-अनुभूति-हिन्दी गुट , नारद उवाच , निठल्ला चिन्तन , निठल्ला चिन्तन , निनाद गाथा , निशांत उवाच , नुक्ताचीनी , नून तेल लकडी , नेपालसे एक चिट्ठा , नौ दो ग्यारह , पंखुड़ी , पठार-ए-सैकता , पहला पन्ना , पहेली , पाकचेष्टा , पाठक साहित्य , पाठशाला :: My Class , पिटारा भानुमती का , प्रतिबिम्ब , प्रतिभास ,प्रतिमांजली , प्रत्यक्षा, प्रपंचतन्त्र, प्रारंभ, फ़ुरसतिया , बनारसी , बस यूँ ही ! , बाकी सब ठीक है , बीच-बजार , बीबीसी से मेरी बात , ब्रज से दूर ब्रजवासी की चिट्‌ठियाँ , ब्लागिया कहीं का , भारत यात्रा , भाव-विचार , भाषा राजनीति , भोजपुरिया , मंतव्य, मन की बात , मसिजीवी , महानदी , महावीर , मानसी , मालव संदेश, मिर्ची सेठ , मुक्त जनपद , मुन्ने के बापू , मुम्बई ब्लॉग , मेरा चिट्ठा , मेरा पन्ना , मेरा राजस्थान My Rajasthan , मेरा हिन्दी ब्लॉग , , मेरी कविताएँ , मेरी कविताएँ , मेरी कविताएं , मेरी कृति , मेरी डायरी : पद्मनाभ मिश्र , मेरी रियासत , मेरे अपने अहसास , मेरे कैमरे से : Through My Lenses , मेरे विचार में , मेरे सपनों का भारत , रचनाकार , रजनीगन्धा , रणवीर का चिट्ठा , रतीना , रत्ना की रसोई , राग- हिन्दी में , रामलाल और भारत , रोजनामचा , लखनवी , लाईफ इन ए एचओवी, लेन , वाह मीडिया! हिंदी ब्लॉग by Balendu Sharma Dadhich , विनीत हिन्दी में … , विमर्श , विवेक , शंख सीपी रेत पानी , शब्‍दशिल्‍प , शब्दायन , शर्मा होम - Sharma Home , श्रीमद्भगवद्गीता , संगीत , संवदिया , सरल चेतना , साहित्य-संसार , सिने गॉसिप , सुगम संगीत , सुमीर शर्मा हिन्‍दी में , सुरभित रचना , सुराज , सुलेखा-साहित्य , सृजन-गाथा , सेहर , हमारी आवाज़ सुनो , हिंदिनी , हिन्दी , हिन्दी और मैं , हिन्दी देवलोक , हिन्दी साहित्य , हिन्दी साहित्य , हिन्दी सेमिनार , हिमांशु का ब्लॉग , हिरण्यगर्भ , हृदयगाथा , हैलॊ उज्‍जैन , हैलो उज्‍जैन , होम्योपैथी-नई सोच/नई दिशायें , जिं द गी , ख़ुशबू , फ़लसफ़े , Bhaat baaji , BIGGEST STORE OF HINDI LYRICS , CHANDAN'S DIARY, Chayachitrakar - छायाचित्रकार , Cheeku , DAAYRA , DAAYRA , e.chhatisgarh , Escaping the Death , Gaurav verma , GREETINGS , Hindi , Hindi Bhashi , HIndi Blog: हिन्दी ब्लाग , Hindi Poetry Collection , Hindi Urdu Poetry , Hindi, und Deutsch (German) Lernen (हिन्दी और जर्मन सीखीये) , HindiWalla , Hindu , hindu , Imagination World :: कल्पना कक्ष , INDIA GATE , JHAROKHA , , kuch yun hee… , Latest entries from ashoka.blog-city.com , magic-I, mahashakti , mantavya , mari bhi suno , My Blog , My Hindi Blog: मेरा हिन्दी चिट्ठा , My Images , my page , Naren's Hindi Blog , Optimastize , Page-1,2,3: First Online Hindi Novel , poetry , Random Expressions, sapnersansaar , shuaib's hindi blog , Shunya hi rss feed , Srijan Shilpi - your friend, philosopher & guide , Stilling Still Dreaming , Tere Hamsafar Geet Hain Tere (THGHT) The Hindi Blog , The Hindi Web , Timepass: समय नष्ट करने का एक श्रेष्ठ साधन , wah kya baat hai…Yeh Bhi Khoob Rahi!!! , world from my eyes - दुनिया मेरी नज़र से!! , Ye Meri Life Hai , YogBlog , yogeshdamle.com , ~ प्रेमपीयूष ~ मेरे कवि मित्र

इंटरनेट पर हिन्दी समेत अन्य भारतीय भाषाओं के प्रचार प्रसार के लिए हाल ही में विश्व की सबसे बड़ी सॉफ़्टवेयर निर्माता माइक्रोसॉफ़्ट की भारतीय इकाई – भाषाइंडिया द्वारा भारत के 9 भारतीय भाषाओं के ब्लॉगों को विविध वर्गों के पुरस्कार दिए गए. हिन्दी भाषा के ब्लॉगों को विभिन्न श्रेणियों में पाँच पुरस्कार प्राप्त हुए – जो यह दर्शाते हैं कि हिन्दी में ब्लॉग लेखन स्तरीय हो रहा है.

हिंदी में उपलब्ध है ई-प्रौद्योगिकी का पाठ-

कंप्यूटिंग और इंटरनेट के प्रारंभिक चरण के दरमियान हिंदीभाषियों के पिछड़ने के पीछे इस विद्या का सारा का सारा पाठ अंगरेज़ी में होना रहा है । पर अब ऐसी स्थिति नहीं है । वाछिंत जानकारी और ज्ञान हिंदी में प्रस्तुत हो रहा है। स्वयं हिंदी के साइट इस दिशा में लगातार आगे आ रहे हैं । प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम् । यदि आप 1. अपने कम्प्यूटर पर हिन्दी देखना चाहते हैं? 2. हिन्दी में काम करना चाहते हैं? 3. कोई जानकारी हिन्दी में चाहते हैं? 4. हिन्दी के बारे में जानना चाहते हैं? 5. हिन्दी की दूसरी बसाइटों के बारे में जानकारी चाहते हैं? तो
वेबहिन्‍दी डॉट कॉम को खंगाल सकते हैं । ऐसे लोग जो हिंदी में कंप्यूटिंग खासकर ऑपरेटिंग सिस्टम, उसके प्रकार, कार्य, एवं विशेषताओं, मोड़, मैमोरी मैनेजमेंट, फाइल मैनेजमेंट, प्रोसेस मैनेजमेंट, डिस्क आपरेटिंग सिस्टम, कमांड्स, विंडोस आपरेटिंग सिस्टम, विंडोज बेसिक आदि के बारे में हिंदी में जानकारी प्राप्त कर हिंदी कंप्यूटिंग में पारंगत होना चाहते हैं उनके लिए सबसे बढिया जालघर है- ई-पुस्तक । ‘इलेक्ट्रॉनिकीआपके लिये’ पत्रिका जो हिन्दी में कम्प्यूटर, विज्ञान एवं नई तकनीक जैसे विषयों पर प्रकाशित होने वाली देश की प्रथम पत्रिका है, भी आनलाइन उपलब्ध है । इसके सहारे कंप्यूंटिंग से संबंधित जानकारी हिंदी में आनलाइन प्राप्त की जा सकती है । इसके अलावा भी इन कार्यों हेतु कई ऐसे वेबसाइट इंटरनेट पर हैं जहाँ पर सरल और बोधगम्य हिंदी में ई-प्रौद्योगिकी की बारीक से बारीक जानकारियाँ संग्रहित की जा सकती हैं ।

इसके अलावा यदि कोई किसी खास जानकारी, संदर्भ को खोजना चाहता है या फिर अपने ज्ञान, जानकारी, संदर्भ-सूचना को संपूर्ण दुनिया के वांछित लोगों के मध्य बाँटना चाहता हैं तो विकिपीडिया और
सर्वज्ञ (ज्ञान का सहकारी कोष)उसका रास्ता देख रहे हैं । इसमें से विकिपीडिया तो विश्व के सबसे बड़े इनसायक्लोपीडिया में से एक है । यहाँ कोई भी निःशुल्क पंजीकृत होकर किसी भी विषय की सामग्री हिंदी में लिख सकता है । उसे प्रतिष्ठित कर सकता है । विकिपीडिया मूलतः हिंदी में ओपेन एनसायक्लोपीडिया है जहाँ हिंदी सहित कई भारतीय भाषाओं की व्यापक संदर्भ और प्रमाणित जानकारी उपलब्ध है और जिसे नियमित अद्यतन किया जा सकता है । कोई भी नवोदित या प्रतिष्ठित लेखक, पत्रकार, या आम आदमी इंटरनेट पर अपनी अभिव्यक्ति सहित हिंदी कंप्यूटिंग की लगभग समस्त जानकारी मुफ्त में इन साइटों से निःशुल्क प्राप्त कर सकता है । ऐसे कार्यों की संभावनाओं पर ही इंटरनेट को कभी ज्ञान और सूचना का विस्फोट कहा गया था ।

हिंदी में शोध एवं किसी खास शोध परियोजना से संबद्ध स्कालर को पहले काफी मशक्कत करनी पड़ती थी । अब एमएसएन, तथा गूगल, हिंदी में अपना-अपना सर्च इंजन ला चुके हैं जिससे किसी खास विषय या सामग्री को हिंदी में टाइप करके ढूँढ़ने की सौगात हिंदी प्रेमियों को मिलने लगी है ।

हिंदी के कुछ नये ऑनलाइन शब्दकोश व शब्दसंग्रह—

हिंदी के लिए देखते ही देखते कोई दर्जन भर ऑनलाइन अंगरेज़ी-शब्दकोश उपलब्ध हो चुके हैं और नये–नये ऑनलाइन शब्दकोश आना जारी हैं। अब हिंदी–हिंदी शब्दकोश व शब्दसंग्रह (थिसॉरस) भी जारी किया जा चुका है जो साहित्यकारों के लिए अत्यंत उपयोगी है। ऑनलाइन अंग्रेजी–हिंदी शब्दकोशों की सूची में एक और नाम जुडा है शब्दनिधि। इसे देबाशीष ने अंतरजाल की नवीनतम तकनॉलाजी एजेक्स का इस्तेमाल कर बनाया है और इसमें काफ़ी विस्तार की गुंजाइशें भी हैं। एक अन्य¸आइट्रांस आधारित हिंदी–अंग्रेजी–हिंदी ऑनलाइन शब्दकोश भी है हिंदी या अंग्रेज़ी किसी भी भाषा में शब्दों के अर्थ ढूंढने की सुविधा देता है। हिंदी में मिलते–जुलते शब्दों को ढूंढने का यह बढ़िया स्थल है। आपको अपने रदीफ़–काफ़िये के लिए उचित शब्दों की खोज यहीं करनी चाहिए।



इंटरनेट में हिंदी का भविष्य-

कहने को इंटरनेट की आयु अभी 10 साल की है । इस मायने में वह शैशवकाल की परिधि लाँधकर एक स्वस्थ बच्चा बन चुका है । पर अल्पायु में ही उसने विखरते हुए दौर में भी समाज को जोड़ने में जिस तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभाया है, वह कम महत्वपूर्ण नहीं । पांरपरिकता विश्वासी और नई प्रौद्योगिकी को शिथिल मति से स्वीकारने वाले भारतीय समाज की जीवन पद्धति से भी वह जुड़ता चला जा रहा है । भारत में जैसे-जैसे टेलिफोन लाइन और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइड़रों (अंतरजाल सेवा प्रदाता) की पहुँच बढ़ती जा रही है लोग इंटरनेट की व्यापक क्षमता और उसकी उपयोगिता को आत्मसात करने लगे हैं । महानगरों एवं खास कर बड़े नगरों में, जहाँ इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स में प्रतियोगिता के कारण अब मध्यम वर्ग के पढे-लिखे लोग भी साइबर कैफे का दरवाजा ताके बिना अपने घरों में ही निजी कनेक्शन लेने लगे हैं । परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी उसकी दस्तकें ब़ाकी है । हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं में उसके सरल विस्तार के कारण समान गति से गाँव और शहरों में उसकी लोकप्रियता सिद्ध नहीं हो सकी है ।

वर्तमान में(दिसंबर,2005) भारत में इंटरनेट के लगभग 50,600,000 उपभोक्ता हैं। जबकि भारत की आबादी 1,112,225,812 है । इसका आशय है कि मात्र 4.5 प्रतिशत आबादी ही इंटरनेट का उपयोग कर रही है । जबकि विश्व की 15.7 एवं एशिया महाद्वीप की 9.9 प्रतिशत आबादी इंटरनेट की उपभोक्ता है । भारत में वर्ष 1998 में कुल आबादी का 0.1 ही इंटरनेट के उपभोक्ता थे । इस तरह से देखें तो प्रतिवर्ष उपभोक्ताओं का दर आबादी के अनुपात में भी नहीं बढ़ रहा है । यदि यह दर स्थिर रहा तो भारत में इंटरनेट ठहराव के संकट से गुजरने लगेगी । लेकिन यदि गूगल कंपनी के मुखिया द्वारा लंदन के कांफ्रेस में की कई भविष्यवाणी पर विश्वास पर करें तो अगले पाँच से दस साल में भारत जितने अन्तर्जाल प्रयोक्ता और कहीं नहीं होंगे और अङ्ग्रेज़ी,
चीनीहिन्दी अन्तर्जाल की प्रमुख भाषाएँ होंगी। जहाँ तक इंटरनेट पर राष्ट्रभाषा हिंदी के विकास का प्रश्न है उसके पीछे स्वयं हिंदीभाषियों में जागरुकता की धीमी गति, तकनीकी अड़चने और उसे निपटने के उपायों के लोकव्यापीकरण की अनियोजित प्रयास हैं । जहाँ तक इंटरनेट पर हिंदी के प्रसार के लिए भारत में 2000-2001 से प्रयास किये जा रहे हैं । इस दौर में इंफ्रास्ट्रक्चर ही कमजोर था । न ब्राडबैंड का व्यापक नेटवर्क था न ही केबल कनेक्शन (आलवेज ऑन कनेक्शन) की सुविधा । इस दौर में वस्तुतः इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर भारतीय बाजार को ही नहीं समझ सके जहाँ आम उपभोक्ता सबसे पहले मुफ्त एवं उपहार में सेवाएं पाने का आदी हो चुका है ।

इधर आईटीसी द्वारा ई-चौपाल के माध्यम से छह राज्यों में फिलहाल ५,६०० ई-चौपालें हैं जो ३५,००० गांवों के ३५ लाख किसानों को सेवा मुहैया करा रही हैं। यह कंपनी २०१० तक १५ राज्यों में ई-चौपालों की संख्या बढ़ाकर २०,००० करना चाहती है। इसी कोण से सोचते हुए समाज के नये-नये क्षेत्रों में संलग्न मानव संसाधन को विशेष कर ग्रामीण भारत में ई-प्रौद्योगिकी को चरणबद्ध ढ़ंग से पहुँचाना होगा । वनस्थली विद्यापीठ द्वारा राजस्थान में सूचना प्रोद्योगिकी लोकीकरण के लिए कायल नेट , ज्ञानोदय एवं ज्ञानजोत जैसी त्रिवर्षीय परियोजना संचालित कर ई-स्वास्थ्य, ई पर्यटन, ई-प्रशासन, ई-व्यवसाय एवं दूरस्थ शिक्षा के समाधान एवं प्रशिक्षण जैसे कारगर कार्य किये जा रहा है जहाँ ग्राणीण ई-शिविरों के माध्यम अल्पशिक्षित लोगों को इस तकनीकी में काम करने की आदत विकसित की जा रही है । ऐसी कारगर परियोजना का अनुसरण अन्य हिंदी राज्यों में भी किया जाना चाहिए ।

हिंदी में स्कैनिंग की त्रुटिरहित तकनीक ''ओ सी आर'' विकसित कर ली जाए तो इंटरनेट पर हिंदी में उपलब्ध अथाह सामग्री और भविष्य में लिखे जाने वाले वाङमय को लाने की गति तेज हो सकती है। ओ सी आर वह तकनीक है जिसमें प्रकाशित साहित्य स्कैनर से अपने आप कंप्यूटर पर टाइप होने लगता है यानी कि टेक्स्ट में तब्दील हो जाता है । इसी तरह से त्रुटिरहित फ़ॉन्ट परिवर्तकों को जनव्यापी बनाया जाना समय की माँग है । इंटरनेट के हिंदी युजर्स बढ़े, इसके लिए आवश्यक है कि हिंदी का मानक की बोर्ड भी देश में लागू हो ।
हिंदी का मुख्य संकट सामग्री का अभाव भी रहा है । एक आँकडे के अनुसार इंटरनेट पर अँगरेज़ी के 20 अरब से अधिक वेबपृष्ठ है जबकि हिंदी में एक करोड़ के आसपास । क्या यह अंतरजाल पर हिंदी की दरिद्रता का प्रश्न नहीं है ? क्या यह बात का सबूत नहीं कि हिंदीभाषियों की पुरानी एवं समकालीन पीढ़ी इस मामले में जागरुक नहीं है ? जहाँ तक पुरानी पीढ़ी की तादात्मयता का प्रश्न है उसके पीछे उम्र का अंतराज एवं अरुचि भी शामिल है । इसके लिए आवश्यक है कि हिंदी कंप्यूटिंग और इंटरनेट की जानकार (तथा युवापीढ़ी भी) ऐसे सयाने रचनाकारों की रचनाओं को वेब पर प्रतिष्ठित करने तथा उसके उपरांत उस रचनाकार की वैश्विक अनुभूतियों के सहारे धीरे-धीरे उन्हें इस प्रविधि से जोड़ता चला जाय । जैसा कि हिंदी के स्वनामधन्य गीतकार स्व.नरेन्द्र शर्मा की 65 वर्षीय पुत्री लावण्या शाह अमेरिका में रहने के वाबजूद अपने स्वर्गीय पिता की रचनाओं की वैश्विक प्रसिद्धि के लिए हिंदी कंप्यूटिंग और इंटरनेट सीखा और आज लगातार इंटरनेट पर अपने पिता के साथ-साथ स्वयं भी लिख रही हैं । जैसा कि वे बताती हैं कि उन्होंने यह ज्ञान अपने इंजीनियर पुत्र से कुछ ही सप्ताह में सीख लिया ।

राजभाषा, हिंदी, शिक्षा, साहित्य एवं संस्कृति जैसे खास मुद्दों से संबंद्ध शासकीय एवं निजी, स्वयंसेवी उपक्रमों की चुप्पी को तोड़े बिना इंटरनेट पर हिन्दी की खस्ताहालत को सुधारा नहीं जा सकता है । कॉपीराइट के शर्तों से मुक्त रचनाओं को इन उपक्रमों द्वारा समस्त विश्व के लिए इंटरनेट पर आसानी से रखा जा सकता है । कई राज्यों की माध्यमिक एवं उच्च कक्षाओं के हिंदी तथा सामान्य कंप्यूटर शिक्षा के पाठ्यक्रमों में वेबडिजायन एवं नयी व अद्यतन तकनीक की जानकारी एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण को अनिवार्यतः जोडें जाने से न केवल हिंदी का विकास होगा अपितु हिंदी में अनेक विषयों का सम्यक ज्ञान भी प्रसारित हो सकेगा । अनछुए तथा साहित्येत्तर विषयों का जो अभाव हिंदी इंटरनेट पर है अब उस पर ज्यादा जोर हर स्तर पर दिया जाना लाजिमी है । ताकि इंटरनेट पर हिंदी की उपस्थिति प्रभावकारी सिद्ध हो सके ।

इंटरनेट में हिंदी का विकास का प्रश्न हिंदी समाज के ज्ञान व सूचना तकनीक में पांरगत होने का प्रश्न भी है । इसका सीधा संबंध ई-गवर्नेंस से है जहाँ आनेवाले समय में कामकाज की सारी पद्धतियाँ कंप्यूटर आधारित होने वाली है । यदि ऐसा नहीं हो सका तो भविष्य में लोगों नई-नई चुनौतियों से जुझना पड़ेगा ।

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0जयप्रकाश मानस

20 comments:

Srijan Shilpi said...

जयप्रकाश मानस जी, आपके इस श्रमसाध्य शोध कार्य को देखकर आपकी स्तुति करने का मन करता है। यह वाकई आपके ही वश की बात है। ऑनलाइन हिन्दी का सारा खजाना आपने एक जगह पिरो कर प्रस्तुत कर दिया है। लेकिन आपने गौर किया कि नहीं कि http://webhindi.com को हैक कर लिया गया है। वेबहिन्दी वालों कुछ करो, जल्द।

अनूप भार्गव said...

बहुत अच्छी खोज कर के इतनी सामग्री को हम तक पहुँचाने के लिये धन्यवाद.

प्रियंकर said...

अत्यंत महत्वपूर्ण एवं उपयोगी लेख . साधुवाद .

Raviratlami said...

अत्यंत श्रमसाध्य व शोघपरक, जानकारीपरक आलेख के लिए साधुवाद!

Hindi Blogger said...

हिंदी ज्ञान-सागर समेटने में आपने कितना वक़्त लगाया होगा, कितनी मेहनत की होगी, उसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है. बहुत-बहुत धन्यवाद इस विस्तृत लेख के लिए.

Jitendra Chaudhary said...

बहुत सुन्दर लेख है। काफी ज्ञानवर्धक और उपयोगी है।
इसको तो हिन्दी की विकिपीडिया मे भी होना चाहिए।
सोचिएगा इस बारे में।


एक परिचर्चा का लिंक ( http://www.akshargram.com/paricharcha ) है उसे भी डाल दीजिएगा, शायद छूट गया है।

ड़ा प्रभात टन्डन said...

आपने तो सारे मोती एक ही धारा में पिरो दिये, बहुत-2 धन्यवाद्।

अनुनाद सिंह said...

जयप्रकाश जी, आपने हिन्दी का बहुत ही उत्साहवर्धक चित्र खीचा है।

Anonymous said...

प्रिय मानस जी,
आपका इंटरनेट के पृष्ठों पर राज करती हिंदी नामक ब्लाग पढ़ा. बहुत ही मेहनत की है आपने. यह किसी भी महत्वपूर्ण शोध से कम नहीं है. बहुत ही अच्छा लगा जब उसमें मेरे हिन्दी की कविताओं वाले लिंको का भी उल्लेख देखा.
बहुत ही बधाई इस महत्वपूर्ण दस्तावेज को सब तक पहुंचाने का.
सत्येश भण्ड़ारी

Rupesh kumar Tiwari said...

आप का यह नविन सृजनात्मक कार्य अत्यन्त ही रोचक, उपयोगी और समरसता से भरे हुए, एक मजे हुए मंच के समान है। जो की अपने में सारे हिन्दी जगत को समेटा हुआ, निले आकाश में शान से सुसज्जित मालूम पडाता है। आपके इस एकत्व कार्य ने तो हम सभी का हृदय को लुभा लिया है।
आपको अनेकानेक धन्यवाद!!
रूपेश

s.k.yadav said...

श्रीमान मानसजी,
आप द्वारा लिखा गया शोध हम सबको बहुत प्रेरणा दे रहा है और यह भ्रम पूरी तहर से टूट गया कि हिन्दी कम्प्युटर युग में हाशिए पर चली गई है. महोदय क्या यह सम्भव नहीं होगा कि हिन्दी में पॉवर पॉइंट, एक्षेल,स्पेल चेकर आदि सुविधाएं एक जगह उपलब्ध हों क्यों कि हिन्दी का उपभोगता तकनीकी ज्ञान में परिपक्व नहीं होता है. महोदय आप का लेख क्या मै विद्यालय की पत्रिका में छपवा सकता हूँ जिससे लोग वर्तमान प्रगति से भिज्ञ हो सकें
एस. के.यादव.
hinpgt@gmail.com
ज.न.वि. कानकोण दक्षिण गोवा

राजपाल देसाई & Anoop desai said...

मै राजपाल देसाई और अनूप प्रभुदेसाई 11वीं कक्षा के छात्र हैं जो आप की साइट से प्रेरणा प्राप्त कर हिन्दी में कुछ कार्य करना चाहते हैं.
plz help me how to write hindi very easy ways.
thamk you
rajpal desai and anoop prabhu desai
jnv canavona

Sanjeeva Tiwari said...

इंटरनेट के पृष्ठों पर राज करती हिंदी इंटरनेट पर हिन्दी के जीजीविषा को सौ फीसदी कम करने में सक्षम शोधपरक लेख है भाई जय प्रकाश मानस ने इसे लिखने में कितना श्रम किया होगा यह अकल्पनीय है हजारों लाखों उपलब्ध वेब साईड के एक एक साईड में जाकर लेख के शब्दों को मूर्त रूप देने में एवं उन शब्दों को सटीक लिंक देने में जो इन्होनें काम किया है वह हिन्दी कम्प्यूटिंग का प्रकाश स्तंभ साबित हो रहा है भाई मानस को इस काम के लिये जितना भी बधाई दिया जाय वो इस लेख के मुकाबिले बहुत ही कम होगा

व्यावसायिक व्यस्तता अधिकांश व्यक्ति को मुद्रित सामाग्री पढने का समय नहीं देता ऐसे में हिन्दी साहित्य संस्कृति किस चिडिया का नाम है वह नहीं जान पाता हिन्दी के और बहुतेरे ज्ञान से वह वाकिफ नहीं हो पाता किन्तु कम्प्यूटर व इंटरनेट से काम के घंटों में भी वह जुडा रहता है क्योंकि संचार के सभी साधन नेट आधरित हो गये हैं इन कार्यों के बीच बीच में प्रत्येक व्यक्ति को इतना तो अवसर मिल ही जाता है कि वह अपने पसंद के साईट पर विचरण कर सके इन अवसरों पर हिन्दी का विस्तृत संसार देख कर पिपासा में निरंतर वृद्धि होते रहती है किन्तु समयाभाव के कारण सही साईटों पर जा पाना संभव नही हो पाता ऐसे क्षणों का भाई मानस के प्रयास से पूर्ण उपयोग व उपभोग हो रहा है

हमारे देश में कार्य संपादन के लिये चीन, जापान, जर्मनी व फ्रांस से आये प्रवासियों से मेरा पाला तब से पड रहा है जब नागपुर से इंटरनेट सेवा छत्तीसगढ में प्रदान किया जाता था मैं तब से यानी विन्डोज ९५ से, मुझे उन प्रवासियों का लेपटाप उपयोग करने का सौभाग्य प्राप्त होते रहा है उनके लेपटाप में उनकी मातृ भाषा को देखकर उनके प्रति बार बार सम्मान का भाव आता था आज भारत मे भी हिन्दी कम्प्यूटिंग के प्रगति और भाई मानस एवं अन्य हिन्दी अर्न्तजाल के चितेरों के प्रयास, उनकी पत्रिका, उनके लेख-ब्लाग्स सोपान रच रहे हैं इसे देख कर मेरी भारतीयता कुलांचे मारती है, भाई मानस को कोटिस: साधुवाद

विनोद पाराशर said...

आदरणीय मानस जी,
इन्टरनेट पर घूमते घामते आपके बलाग तक पहुचा.हिंदी के संबंध में,इतनी महत्वपूर्ण जानकारी-वह भी हर विषय पर.सच! आपने तो गागर में सागर भर दिया हॆ.मॆं हिंदी साहित्य पठन-लेखन से जुडा व्यक्ति हूं, लेकिन अंग्रेजी व कम्प्यूटर तकनीक-दोनो में मेरा हाथ तंग हॆ.मुझे तो ऎसा लगा-जॆसे सोने का खजाना हाथ लग गया हॆ.
आपका अपना ही-विनोद पाराशर(दिल्ली)
4:38 PM

दुर्गेश गुप्त "राज" said...

जय प्रकाश जी,
बहुत मेहनत की हॆ आपने इस आलेख में. गागर में सागर समेट दिया हॆ. बहुत-बहुत बधाई. नमन आपके हिन्दी के प्रति इस समर्पण को. शीघ्र ही इस आलेख को "अनुरोध.काम" से सम्बद्ध कर रहा हूं. सादर.
-दुर्गेश गुप्त "राज"
संपादक : www.anurodh.com
चिट्ठा : anurodh55.wordpres.com

anshul15 said...

आदरणीय मानस जी
आपका लेख बहुत पसंद आया,नेट पे खोजते खोजते ही मिला ,ऐसे ही एक साइट भी मिली जाहा हिंदी टाइप सीखे बिना ही हिंदी लिख सकते है,वो भी बड़ी आसानी से. लिंक दे रहा हू,देखे...http://quillpad.in/new/quill.html

anand said...

प्रिय मानस जी, सबसे पहले तो आपको ओशो नमन ....
कृपया ओशो पे कुछ सामग्री अपने आलेखो में देने की अनुकंपा करें.....
बड़ी कृपा होगी .....
हिंदी रशिक़

Sanjeet Tripathi said...

सशक्त आलेख!!

यही वह आलेख है जिसे ऑनलाईन पढ़कर मुझे इंटरनेट पर हिंदी की सक्रियता के बारे मे मालूम चला था। हुआ यूं कि मेरे बड़े भाई जो कि एक डॉक्टर कम और साहित्यकार ज्यादा हैं, ने एक दिन अचानक मुझे अपने ई मेल से यह लिंक ओपन कर दिखाया कि देखो हिंदी का कमाल!! मै आश्चर्यचकित हुआ और फ़िर बाद में इसे पूरा पढ़ा, दिए गए लिंक्स के सहारे सब साईट्स पर घूमा और फ़िर परिणिति हुई अपना खुद का ब्लॉग आवारा बंजारा बनाने के रुप मे।

मुझे आपका आभारी होना चाहिए!!
आभार!!

उन्मुक्त said...

अच्छा शोध है।

हिन्दुस्तानी said...

वाह ! मानस जी
इतना अच्छा लेख है की पूरा पढ़ने के बाद ही शांति मिली.. इतना बड़ा लेख और इतनी अच्छी जानकारी देने के लिए आपको साधुवाद !!

एक हिंदी प्रेमी !