Tuesday, October 16, 2007

पासवर्ड को हैकर्स से बचानेवाला नायाब सॉफ्टवेयर

वेब-भूमि-9

स्मरणशक्ति भी बड़ी नायाब चीज़ होती है । कब साथ छोड़ दे, कह नही सकते । कई बार कम्प्यूटर और इंटरनेट उपयोग कर्ता अपना आईडी और पासवर्ड ही भूल जाया करते हैं । नेट पर विभिन्न तरह के कार्य से लेकर मात्र ई-मेल का उपयोग करने वाले सामान्य से सामान्य यूजर्स भी चाहता हैं कि उसके स्वयं का आईडी और पासवर्ड्स कोई याद रख दे । इतना ही नहीं कुछ लोग अपनी कमजोरीवश हैकर्स से डरते रहते हैं कि कहीं उसका अपना पासवर्ड भी हैकिंग न हो जाये । अक्सर जब कोई बुनियादी और आवश्यक निजी जानकारी उसे संबंधित साइट के फार्म में भरना होता है तो आलस्य का अनुभव करने लगता है और सिर खुजलाने लगता है । ऐसी बहुत सारी दिक्कतों से मुक्ति दिलाने का काम अब तकनीक ने संभव कर दिखाया है । न पासवर्ड याद रखने की कवायद न ही किसी लम्बे फार्म को भरने का सिरदर्द । ऊपर से पासवर्ड और आईड़ी को हैंकर से बचाने की पूर्णतः सुरक्षा का उपहार भी । यह सारी दुनिया में रोबोफार्म के नाम से जाना जाता है ।

रोबोफ़ार्म की प्रसिद्धि के बारे में इतना ही जान लेना काफ़ी है कि उसके लांच होने के कुछ ही दिन के भीतर ही इसे दुनिया भर के उपयोगकर्ताओं द्वारा 8 मिलियन से ज्यादा बार डाउनलोड़ किया जा चुका है। सिर्फ़ इतना ही नहीं, रोबोफार्म PC Magazine Editor's Choice और CNET Download.com's के द्वारा सॉफ्टवेयर ऑफ ईयर की प्रतिष्ठा भी अर्जित कर चुका है । इसका मुफ्त वितरण और स्पाईवेयर और एडवेयर यानी कि अवांछित वायरस से मुक्त होना उसकी लोकप्रियता की खास वज़ह जो है ।

रोबोफार्म सबसे अच्छा पासवर्ड मैनेजर और वेब फार्म फिलर है जो पूरी तरह से अपने आप पासवर्ड और फार्म भर देता है। आइये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं । रोबोफॉर्म
याद रखता है आपके पासवर्डस् और लॉग करवाता है आपको वह भी अपने आप। यानी कि स्वचालित । यह लम्बे रजिस्ट्रेशन और चेकऑउट फार्मों को सिर्फ एक क्लिक भर देता है । आपके पासवर्डों को पूर्ण सुरक्षा देने के लिए एंक्रिप्ट करता है । बेतरतीब पासवर्डों को जनरेट करता है ताकि कोई भी हैकर उसका अनुमान ही न लगा सके । यह फिशिंग से भी लड़ता है अर्थात् सिर्फ मेल खाती हुईं वेब साइटों पर पासवर्डों को भरते हुए। पासवर्डों को कीबोर्ड के बिना ही टाइप करते हुए कीलॉगर्स को हराता है । आपके पासवर्डों को, कम्प्यूटरों के बीच में कॉपी करते हुए बैकअप करता है। रोबोफॉर्म सिंक्रनाईज़ करता है पासवर्डों को कम्प्यूटरों के बीच में गुडसिंक का प्रयोग करते हुए। इसकी खासियत यह भी है कि यह इंटरनेट एक्सप्लोरर्, AOL/MSN, फायरफॉक्स जैसे बहुप्रयुक्त ब्राउजर के साथ तटस्थ: काम करता है । यदि आप तैयार हैं तो यह लीजिए पता - www.roboform.com/hi/ । लॉग ऑन होइये तो चंद मिनटों में ही ढ़ेरों समस्याओं से मुक्त हो उठिये । संशय मत करिये कि आपको ज़्यादा अँग्रेज़ी नहीं आती । यह साइट अपनी भाषा में भी है ।

चलते-चलते
रिश्वतखोरी विश्वव्यापी समस्या है । विचारक, नेतागण, पत्रकार, साहित्यकार के साथ-साथ आम आदमी भी आये दिन इससे मुक्त होने के लिए भाँति-भाँति का परामर्श देते हैं । अब कुछ ट्रेक्नोक्रेट भी इस विश्वव्यापी दानव से जूझने का मन बना चुके हैं । ऐसा लगता है उनके द्वारा सुझाये गये उसे नये उपाय को देखकर । उन्होंने प्रौद्योगिकी का सहारा लेते हुए एक नया रास्ता खोज निकाला है । संक्षेप में कहें तो ग्लोबल ऐंटी करप्शन वेबसाइट अब दुनिया भर के भ्रष्ट्राचार निवारण के लिए लांच हो चुका है ।

वॉशिंगटन के कुछ कंपनियों के एक समूह ने ऐसी वेबसाइट शुरू की है जो दुनिया भर के रिश्वतखोर अफसरों और सरकारों का ब्यौरा रखेगी। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के एक गैरलाभकारी समूह ट्रेस इंटरनैशनल ने कहा कि उनकी नई वेबसाइट ब्राइबलाइन डॉटओआरजी में लोग या संगठन अपना नाम जाहिर किए बिना ही रिश्वत मांगे जाने संबंधी शिकायत कर सकेंगे। अमेरिका स्थित ट्रेस इंटरनेशनल ने कहा कि उसका इरादा लोगों के नाम एकत्र करना नहीं बल्कि रिश्वत देने और लेने वालों को समझना, मामलों की जाँच करना और फिर कानूनी कार्रवाई करना होगा। लोग रिश्वत माँगे जाने की शिकायत एक ऑनलाइन फार्म के जरिए कर सकते हैं। ब्राइबलाइन साइट पर उपलब्ध इस फॉर्म में 10 सवाल होते हैं।

जो भी हो इससे भले ही रिश्वतखोरी पर प्रत्यक्षतः लगाम नहीं लगया जा सकता परंतु उसे विश्वव्यापी अपमान का भागीदार तो सिद्ध ज़रूर किया जा सकता है। प्रौद्योगिकी और विश्वग्राम की वर्तमान जीवनशैली में यह भी कम दंड़ नहीं है और हम जानते हैं ही हैं, समाजशास्त्रीय सच भी है कि अपमान बहुत बड़ा सामाजिक नियंत्रण है ।

Monday, October 15, 2007

दुनिया में हिंदी-रस घोलता रेडियो यानी सलाम नमस्ते

वेब-भूमि-8
लगता है सचमुच रेडियो की वापसी होने वाली है । भारत में भले ही यह अभी बहुत दूर है किन्तु पश्चिमी-दुनिया में रेडियो की वापसी तेजी से हो रही है । इंटरनेट के कारण रेडियो भी वैश्विक होने लगे हैं । सुखद तो यह कि इसमें भारतीय बढ़ चढकर योगदान दे रहे हैं । मैं बात कर रहा हूँ रेडियो सलाम नमस्ते की जो सारे विश्व को हिंदी के सातों रस में घोलने लगा है । अमेरिका की डलास शहर से इसे सच कर दिखाया है – चालीस वर्षीय युवा अहिंदीभाषी जयपाल रेड्डी ने । वैसे तो यह यू.एस.ए का पहला एफ एम (104.9)रेडियो स्टेशन है जो सातों दिन चौबीस घटों अपने प्रसारण के लिए चर्चित है किन्तु इंटरनेट के कारण यह समूचे विश्व में चर्चित होने लगा है । इसके सारे कार्यक्रम संपन्न भारतीय दृष्टि से प्रसारित किये जाते हैं । आखिर ऐसे रेडियो प्रसारण को दुनिया भर में प्रतिसाद न क्योंकर मिले ! प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम् - चलिए और लॉग ऑन करके सुन लीजिए- www.radiosalaamnamaste.com/

रेडियो सलाम नमस्ते भाषायी विविधता को प्रोत्साहित करने वाला प्रतिष्टान है । इस मायने में वह पश्चिम की भाषायी वर्चस्ववाद का जबाब भी है । यहाँ हम हिंदी के अलावा तीन भाषाओं का आस्वाद ले सकते हैं । भविष्य में यहाँ से कई भाषाओं में प्रसारण की योजना बनायी जा रही है । कविताजंलि(प्रस्तोता- नंदलाल सिंह और आदित्यप्रकाश सिंह), गुलदस्ता, चलते-चलते(नीलम), एक गरम चाय की प्याली(अंबरीन), चाँदनी रातें(रोहित), ज़िंदगी का सफ़र (गिरीश कल्याणपुरी) आपकी सेहत(डॉ. हैदर) ऐसे लोकप्रिय कार्यक्रम हैं जिनकी प्रतीक्षा बड़ी बेसब्री से देश-विदेश के श्रोता करते हैं । शेष समय यह मनोरंजनात्मक हो जाता है । इसका भी एक कारण है - पश्चिम दुनिया में रहने वाली भारतीयों की नयी पीढ़ी हिंदी फिल्मों के बारे में जानने को अधिक उत्सुक रहता है । रेडियो सलाम नमस्ते में नये-पुराने गानों की बरसात होती रहती है । लगता है मनभावन फुहारें है मानसून की । प्रतिदिन मध्यान्ह 1.30 से 2 बजे तक समाचार प्रसारित किये जाते हैं । रेडियो सलाम नमस्ते को एक पूर्ण भारतीय रेडियो कहा जाना अनुचित नहीं होगा । क्योंकि विज्ञापन भी हिदीं में प्रसारित किया जाता है । यहाँ अन्य भारतीय भाषाओं से कोई टकराव या दुराव नहीं है बल्कि समय-समय पर पंजाबी, गुजराती आदि भाषा में भी प्रसारण किया जाता है। शायद यही कारण है कि अमेरिका का हर प्रवासी भारतीय इन रेडियो सलाम नमस्ते को दिल से सुनता है । यहाँ भारत में भी ऐसा कोई रेडियो नहीं है जो रात दिन इस तरह प्रसारण करता हो । और वह भी हिंदी में । रेडियो सलाम नमस्ते को आप लगातार सुनें तो निश्चित ही युवाओं पर संस्कृतिभ्रष्टता का आरोप लगाना भूल जायेंगे । इस रेडियो के लगभग सारी टीम सतर्क और समर्पित युवाओं की है । चाहे आप इसके दोनों वाइस प्रेजीडेंट्स को लें जिन्हें हम मोहम्मद अब्बास या अम्बरीन हसनात के नाम से जान सकते हैं । एक और प्रतिभा मोनिका शर्मा का नाम लिये बिना रेडियो सलाम नमस्ते की कहानी पूरी नहीं हो सकती । वे रेडियो पत्रिका का सम्पादन करती हैं । यह पत्रिका पूरी तरह मुफ़्त वितरित की जाती है । वे इसके साथ-साथ हैलो डलास कार्यक्रम का कुशल संचालन भी करतीं हैं । सीता की वापसी कराने वाली राम की सेना के सेनापति की तरह जुटे रहते हैं वे दोनों । सच तो ही है हिंदी की सीता इन दिनों रावण के राज्य में ही तो निर्वासित है ।

वैसे तो सारे के सारे कार्यक्रम एक आदर्श रेडियो श्रोता को बाँधे रखने में सफल हैं किन्तु जहाँ तक कवितांजलि नामक कार्यक्रम की बात है उसकी जितनी प्रशंसा की जाय उतनी कम है । यदि आप वास्तव में एक अच्छे कवि हैं तो मान कर चलिए आपके पास कभी भी हिंदीसेवी आदित्यप्रकाश सिंह का कभी भी डलास से सीधा फोन आ सकता है । उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप भारत के किसी गाँव में रहते हैं या फिर पाकिस्तान में रहते हैं । इस वैश्विक रेडियो से कविता प्रसारण होने का गौरव तो मिलेगा ही बतरस का आनंद अलग से उपलब्ध करायेगें सिंह साहब। पर आपमें यदि थोड़ा-सा भी उच्चारण दोष है तो आप बच नहीं पायेंगे उनकी पारखी नज़रों से । इतने सतर्क रहते हैं जैसा भाषाविज्ञानी रहता है । हो भी क्यों ना, उनका बचपन जो गोपाल सिंह नेपाली के सानिध्य में गुजरा है।
चलते-चलते-
माल्लपुरम् (केरल) भारत का पहला ई-जिला बन चुका है । केरल सरकार ने राज्य के एक पिछड़े जिले में विश्व के सबसे बड़े ग्रामीण वायरलेस ब्रॉडबैण्ड सेवा की स्थापना कर उसे भारत का पहला ई-साक्षर जिला में परिणत कर दिया है। इसके द्वारा लोग ई-मेल के माध्यम से अपना बिजली जमा कर सकते तथा जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह के बिल के ई-भुगतान के लिए भारतीय स्टेट बैंक को नियुक्त किया गया है। साथ ही, जिले में स्थित पुलिस केन्द्र तक अक्षय केन्द्र या सूचना कियोस्क से ई-मेल के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज़ करा सकते हैं।

Saturday, October 13, 2007

आया हवाई ऑपरेटिंग सिस्टम

वेब-भूमि-7

कंप्यूटर और इंटरनेट का गंभीर रूचि रखने वाले मेरे बेटे की जिज्ञासा थी – क्या बिना ऑपरेटिंग सिस्टम किसी एप्लीकेशन या सॉफ्टवेयर पर काम किया जा सकता है ? मैंने तब यूँ ही कहा था – यह तो नामुनकिन है । लगभग टाल-सा दिया था उसे । शायद मैं भी भारतीय टेक्नोक्रेट्स के कौशल का आंकलन नहीं कर सका था जिनके बदौलत हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि जी हाँ, अब बगैर ऑपरेटिंग सिस्टम अपने कम्प्यूटर या पीसी को हम कहीं से भी एक्सेस कर सकते हैं। और सिर्फ इतना ही नहीं किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम की फाइलों को किसी भी कंप्यूटर पर रीड़ कर सकते हैं, उनका उपयोग भी कर सकते हैं । हमारे पास इंटरनेट कनेक्शन मात्र हो । कहने का आशय तो यही कि अब हवा में होगा हमारा ऑपरेटिंग सिस्टम ।

एक कंप्यूटर उपयोगकर्ता इतना तो जानता ही है कि यदि पीसी के हार्ड डिस्क यानी कि बूटिंग डिस्क में ऑपरेटिंग सिस्टम ही न हो तो उसके सम्मुख कभी भी कमांड प्राम्ट नहीं आयेगा । कंमाड प्राम्ट नहीं आयेगा तो पीसी किसी भी उपयोग लायक नहीं रहेगा, तब वह खाली डिब्बे से ज़्यादा नज़र नहीं आयेगा । ऑपरेटिंग सिस्टम ही वह मंच है जो पीसी को काम करने योग्य बनाता है । यही कारण है कि पहले हार्ड डिस्क पर सबसे पहले ऑपरेटिंग सिस्टम (ओएस) इंस्टाल होता हैं जिसकी सहायता से किसी भी इंस्टाल किये एप्लीकेशन या सॉफ्टवेयर पर मनमाफ़िक कार्य किया जा सकता है । चाहे वह विडोंज हो या मैक या फिर लाइनेक्स या यूनिक्स ही क्यों न हो ।

आम पीसी उपभोक्ता यह भी जानता है कि एक आपरेटिंग सिस्टम में तैयार फाइल किसी अन्य आपरेटिंग सिस्टम वाले पीसी में कतई काम नहीं आता है । उदाहरण के तौर पर यदि विडोंज के एमएसवर्ड में तैयार डेटा या फाईल को मैकिंटोश या लिनक्स के वर्ड पर न खोला जा सकता है, न पढ़ा जा सकता है न ही उसमें संशोधन किया जा सकता है । यह सभी जानते हैं कि विभिन्न देशों में अलग-अलग तरह के ओएस(operating system) प्रचलित हैं । यहाँ तक कि एक ही देश के विभिन्न शहरों में भी समान ओएस प्रचलित नहीं है । यह भी कम अड़चन नहीं थी । इसे एक उदाहरण से समझते हैं - माना कि किसी भारतीय को किसी ऐसे देश में चाहे व्यापार के सिलसिले में हो या जॉब या किसी अन्य प्रसंग पर प्रस्तुतिकरण (Presentation) करना हो, और वहाँ के पीसी में विंडोज के स्थान पर लाइनेक्स या मैक ओएस वाली पीसी हो तो वह सीडी या पेन ड्राइव में डेटा रखने के बाद भी किंकर्तव्यविमूढ़ होकर रह जायेगा । सब कुछ उसका धरा का धरा रह जायेगा । प्रौद्योगिकी की तेज रफ़्तार वाले इस युग में इस कंप्यूटरी बाधा को दूर करने में हो सकता है कि कई देश के टेक्नोक्रेट लगे हों पर सफलता जिसे सबसे पहले मिली है उनमें भारतीय भी हैं । इसका हल ढूँढ़ निकाला है मद्रास के सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने । नाम है निवियो । पता है –
www.nivio.com

यूँ तो वर्षों से ब्राउज़र के मार्फत ऑइस तरह के लिनक्स आधारित रिमोट ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग की बात सुनाई देती है । कई ऐसे ऑनलाइन प्रयोग भी हो चुके हैं और कुछ तो सफल भी हो रहे हैं । (आज कम से कम 12 प्रकार के ऐसे ही ऑनलाइन ऑपरेटिंग सिस्टम प्रचलन में हैं । इसमें प्रमुख हैं -
1. Craythur (www.craythur.com) 2. Desktoptwo (www.desktoptwo.com) 3. EyeOS(www.eyeos.com) 4. Glide (www.glidedigital.com) 5. Goowy (www.goowy.com )6. Orca (www.orcaa.com)7. Purefect 8. SSOE 9. XinDESK 10. YouOS (www.youos.com) ) परंतु विंडोज़ एक्स-पी आधारित निवियो नामक यह वेब अनुप्रयोग अपने किस्म का अनोखा और अव्वल है ।

यदि आप इस ऑनलाइन आपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करने की ख्वाहिश रखते हैं तो चलिए हमारे साथ – पहले इंटरनेट से जुडिए । फिर
www.nivio.com पर लॉग आन होइये । कुछ ही क्षण मे ओएस आपके सम्मुख होगा । हो सकता है कि आपको कुछ ज्यादा इंतजार करना पडे । ओएस के आते ही स्वयं को रजिस्टर कीजिए । रजिस्टर्ड होते ही आप प्रयोगकर्ताओं की कतार में सम्मिलित हो जायेंगे । तब वह खुद ब खुद आपको आमंत्रित करेगा कि आइये मेरे आका ! मैं आपकी सेवा के लिए तैयार हूँ । जब एक बार डेस्कटॉप को एक्सेस कर लेंगे तो आप मुक्त और आराम से कई तरह के प्रोग्रामों पर कार्य कर सकते हैं जैसे – वर्ड, एक्सेल, पॉवरपाइंट आदि-आदि । शुरु में आपको इस आनलाइन आपरेटिंग सिस्टम पर कार्य करने के लिए एक माह का समय मिलेगा । इसके बाद आपको निवियो कंपनी को प्रत्येक माह 399 रुपया अदा करने होंगे जो सुविधा को देखते हुए कम ही है । विद्यार्थियों के लिए यह शुल्क मात्र 199.50 रुपये प्रति माह है । निवियो को अदा की गई राशि के एवज में आपको एक पैकेज मिलेगा जिसमें 5 जीगाबाइट आनलाइन स्टोरेज, संपूर्ण विंडोज डेस्कटाप, एडाब एक्रोबेट रीडर8, आइट्यून्स और फॉयरफॉक्स मिलेगा । इसी साइट पर माइक्रोसाफ्ट ऑफिस 2003 भी कुछ शुल्क के साथ उपयोग हेतु उपलब्ध है । यदि आप पैसा बचाना चाहते हैं तो वैकल्पिक तौर पर वहाँ ओपन ऑफिस सुइट पर काम कर सकते हैं ।

निवियो की विशेषता यह भी है कि वह सुरक्षा सेवा भी प्रदान करती है – यहाँ की सभी फाइलें वायरस और स्पैम मुक्त होती है । फिलहाल तो यह बीटा संस्करण(टेस्टिंग) की स्थिति में है । आम जन के इस्तेमाल के लिए जारी नहीं किया गया है । उपयोगिता की दृष्टि से यद्यपि यह हिंदी में काम करने वालों के लिए किसी खास काम का नहीं है किन्तु भविष्य में यहाँ वांछित एप्लीकेशनों को भी इंस्टाल करके उपयोग किया जा सकता है । खास कर उन लोगों के लिए जो लैपटाप का बोझ भी नहीं उठाना चाहते । या फिर लैपटाप भी खरीदना नहीं चाहते । यहाँ अपना बैकअप भी सुरक्षित रखा जा सकता है । यहाँ अतिमहत्वपूर्ण दस्तावेज भी सबकी नजर बचाकर रखा जा सकता है । फिलहाल और क्या चाहिए । आइये स्वागत करें इस विडोंज आधारित विश्व के प्रथम ऑनलाइन ऑपरेटिंग सिस्टम का ।