Monday, October 08, 2007

किसानों का नया सखा है इंटरनेट

वेब-भूमि-3

इस वक्त मैं अपने शहर के एकाकी कक्ष में कंप्यूटर के सम्मुख बैठे-बैठे इंटरनेट पर जूझ रहा हूँ पर खिड़की से साफ-साफ दिखाई देती मानसून की पहली फूहार से मुझे धरती पुत्र याद आने लगा है। शहर निवासी स्वयंभू धरतीपुत्र नहीं । प्रायोजित विज्ञप्तियों वाला धरतीपुत्र भी नहीं बल्कि वह माटी का बेटा जो सारे हिन्दुस्तान के लिए अन्न उपजाता है । गरीब के घर जनमता है, गरीबी की गोद पलता है और गरीब लोगों के कांधे में सवार होकर एक दिन चुपचाप श्मशान की ओर चल देता है – लहलहाते खेतों को अकेले छोड़कर । खिलखिलाते खलिहान को उदास छोड़कर ।

मेरे मन में एकाएक प्रश्न उभरता है – आखिर यह नई प्रौद्योगिकी किसानों के जीवन में कितनी खुशियाँ ला सकता है ? कंप्यूटर और इंटरनेट की क्षमता का आंकलन करने पर बुद्धि से जबाब मिलता है तो प्रसन्नता से भर उठता हूँ । राहत महसूसता हूँ कि सिर्फ शहरी लोगों के लिए नहीं अपितु गाँवो की ज़िंदगी में भी क्रांतिकारी परिवर्तन लाने में ये दोनों चीजें कारगर हैं। मित्रवत् हैं । सखाभाव है इनमें । बशर्ते कि उन्हें किसानों तक पहुँचाया जाय । किसानों को उस स्तर पर शिक्षित किया जाय।

यदि गाँव के चौपालों तक कंप्यूटर और इंटरनेट पहुँच गया तो समझिए कि वह कृषि की सारी उन्नत तकनीक को जान सकता है । विकसित तौर-तरीकों को आत्मसात कर सकता है । इसके लिए वह घर वैठे भारतीय किसान का सूचना केंद्र यानी कि http://www.krishisewa.com/ पहुँच सकता है । भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र के जाल स्थल (www.icar.org.in/hindi)में जाने की देरी है । वहां वह मौसम वार फसल, बीजोपचार, रोग एवं निदान, मंडी भाव की जानकारी और ज्ञान मुफ्त में प्राप्त कर सकता है । यह धान, गेहूँ, आलू प्याज से लेकर मशरूम, सर्पगंधा, बायोडीजल आदि के उत्पादन, विपणन, बिक्रय की वांछित पाठ पढ़ाने वाली नियमित पाठशाला है । यहाँ हर किसान फसल विज्ञान, बागवानी, प्राणी विज्ञान, कृषि अभियांत्रिकी, प्राकृतिक संसाधन, मछली पालन आदि की व्यापक जानकारी हासिल कर सकता है । देश-विदेश के कृषि समाचार का अतिरिक्त आनंद । उसके अपने सांसद लोकसभा में लफ्फाजी करते हैं या उसकी आवाज़ उठाते हैं यह की चुगली भी यह साइट बकायदा करता है । विधायक महोदय विधान सभा में सोते रहते हैं या कुछ उसके हित पर बहस करते हैं या नही । यह भी किसान यहाँ से जान सकता है । किसानों के जीवन से जुड़े सारे समाचार के लिए नेट पर चर्चित साइट है – किसान समाचार डॉट कॉम ।

हमारे कुछ कृषक खासकर उन्नत किसान जो अंग्रेजी पढ़ना-लिखना जानते हैं वे राष्ट्रीय बायोडायवर्सिटी अथारिटी (www.nbaindia.org)और अनेक प्रांसगिक और महत्वपूर्ण साइट में जाकर अपनी जानकारी को दूरुस्त कर सकते हैं । कृषक आयोग, भारत सरकार भी हिंदी में साइट चलाता है। जहाँ (www.krishakayog.gov.in)कृषि नीति से लेकर अन्य शासकीय कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जान सकते हैं ।

नवोदित राज्य झारखंड के कृषि प्रशासकों की प्रशंसा की जानी चाहिए कि वे केंद्रीय सहयोग से अपने राज्य के किसानों को प्रौद्योगिकी से जोड़कर विकसित करने में ईमानदार दिखाई देते हैं । www.bitmesra.net में आगे बढ़ने से बहुत सारी नयी और वैज्ञानिक जानकारी कृषकों को मिलने लगती है जैसे- भूमि संरक्षण, शुष्क भूमि तकनीक, मिट्टी एवं नमी परीक्षण, मानसून देर से आने से फसल प्रवंधन, बोआई की तैयारी आदि।

जो किसान जड़ी-बूटी यानी कि औषधीय फसल अपनाना चाहते हैं उनके लिए महत्वपूर्ण गुरु हो सकता है -www.hrdiua.org । उत्तरांचल का यह साइट भी हिंदी भाषा में है । हर्बल राज्य बनाने का सपना देखने वाले राज्य सरकारों के लिए यह वेबसाइट एक ई-पाठ की तरह है । शैक्षणिक एवं अन्य संस्थानों की पारस्परिक क्रिया के लिए रक्षा कृषि शोध प्रयोगशाला की भी शैक्षिक साइट(www.drdo.org) कम महत्वपूर्ण नहीं जहाँ अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय संस्थान तथा कृषि विश्वविद्यालयों की सम्यक जानकारी उपलब्ध है । हरियाणा सोनीपत के जिला प्रशासन और कृषि विभाग भी इंटरनेट पर इन दिनों कृषकों का ध्यान आकृष्ट कर रहा है । sonipat.nic.in कृषकों के लिए मार्गदर्शिका की तरह है । बिहार के राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, वैशाली अर्थात् kvkvaishali.bih.nic.in का भ्रमण कम फायदेमंद नहीं जहाँ फलों के उत्पादन के बारे में आवश्यक सूचनाएं और जानकारियाँ उपलब्ध हैं । हाल ही मैं इंडिया डेव्हलपमेंट गेटवे नामक संस्था ने कृषि पर एक समृद्द जास स्थल विकसित की है यहाँ कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड, रेशम, भेड़, बकरी, खरगोश, सुअर पालन, आदि की से संबंधित जिज्ञासाओं का शमन किया जा सकता है । यहाँ ग्रामीण ऊर्जा विषयक काफी पठनीय सामग्री भी है । इस जाल स्थल का पता है - www.indg.in/agriculture । जो घर बैठे पर्यावरण के बारे में नियमित पत्रिका बाँचना चाहते हैं उनके लिए पर्यावरण डाइजेस्ट नामक पत्रिका ऑनलाइन मौजूद है – www.paryavaran-digest.blogspot । वैसे तो यह ब्लॉग तकनीक पर है पर सामग्री को सुचारूपूर्वक रखा गया है ।

भारतीय लोक में भी कृषि संबंधी प्रणालियों, संकेतों और उपचारों का दर्शन होता है । इस प्रसंग में हम घाघ को नहीं बिसार सकते । घाघ की कृषि कहावतों को भारत सरकार ने सजाकर रखा है और http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/dharti.htm में धऱती और बीज नामक एक महत्वपूर्ण किताब भी आनलाइन है जो जाने माने लेखक राजेन्द्र रंजन चतुर्वेदी द्वारा लिखी गयी है जो अपनी कोटि की हिंदी में पहली पुस्तक है। कहने को कृषकों के लिए कई जगह है नेट में पर वे या तो अंग्रेजी में हैं या फिर अपठनीय फोंट में हैं ।

ज़मीन का नक्शा कंप्यूटर में
कंप्यूटर और इंटरनेट किसानों के अर्थशास्त्र को भी बदलने वाला है । ये दोनों जटिल जमीन विवाद हल करने की दिशा में भी कारगर हो सकते हैं जिसकी शुरुआत उत्तरप्रदेश के राजस्व परिषद ने जमीनों के कई दशक पुराने नक्शे डिजिटल करने की प्रक्रिया के रूप में कर चुकी है । लखनऊ, गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में यह काम पूरा हो चुका है और इस साल सत्रह अन्य जिलों में योजना लागू हो जायेगी। इसके बाद इन बीस जिलों के लोग अपनी दशकों पुरानी मिल्कियत न सिर्फ देख सकेंगे बल्कि तहसील दफ्तर से जमीन के नक्शे का कंप्यूटर प्रिंट साधारण फीस पर खरीद भी सकेंगे। अब वहाँ लोगों को नक्शों के लिए तहसीलों के चक्कर लगाने नहीं पड़ते हैं। भूमि विवाद हल करने में सहुलियत हो रही है । बताया जा रहा है कि वहाँ डेढ़ करोड़ खतौनी कंप्यूटर से तैयार हो चुके हैं । लेखपाल की खुशामद करने से छुटकारा दिलाने में प्रौद्योगिकी का यह चमत्कार कम नहीं है । किसान हितैषी होने का दंभ भरने वालों को सोचना चाहिए कि कैसे प्रौद्योगिकी का सहारा लेकर उन्हें भ्रष्टाचार से मुक्त किया जा सकता है ? कलेक्टर और तहसीलदार साहब के घर दुध पहुँचाने की आड़ में किसानों से हजारों रुपये डकारने वाले पटवारियों और आरआई से गरीब आदिवासी कृषकों को कब मुक्ति मिल सकेगी ? लालफीता शाही और रिश्वतखोरी के पंजे से भूमिपुत्र को कैसे बचाया जा सकता है और इसमें कंप्यूटर और इंटरनेट कैसे उपयोगी साबित हो सकता है इस दिशा में कौन-कौन से कारगर कदम उठाये जा सकते हैं ? किसानों के नाम पर करोड़ों का कंप्यूटर खरीद लेने मात्र से सरकार कुछ नहीं कर सकती है सिर्फ कमीशनबाजी के अलावा । बाँते भी बहुत है कंप्यूटर और इंटरनेट पर विकसित तकनीक को लेकर जो किसानों को कई कोणों से उन्नत और खुशहाल बना सकते है । इसकी चर्चा फिर कभी ।

चलते-चलते –
इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करना अब आसान हो जाएगा। वे घर बैठे-बैठे एक क्लिक कर इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर सकेंगे। काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में एक वेबसाइट विकसित करने जा रहा है। वेबसाइट बनने के बाद शिवभक्त काशी विश्वनाथ मंदिर की वेबसाइट पर जाकर प्रार्थना कर सकेंगे।तिरुपति बालाजी मंदिर, सिद्धि विनायक मंदिर और वैष्णव देवी तीर्थ के सफल ई-दर्शन से प्रेरित होकर ट्रस्ट ने भी मंदिर के दर्शन के लिए वेबसाइट विकसित करने का निर्णय लिया है ।

Saturday, October 06, 2007

घर बैठे सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर

वेब-भूमि-2

वैसे तो मैं प्रार्थना करता हूँ कि ईश्वर आपको न्यायालय जाने से बचाये । वकील साहब का मुँह भी देखना न पड़े । घर-घाट न बिके । मन का सुकून सलामत रहे, पर ख़ुदा न खास्ता; कहीं से आपको न्याय न मिले और आप न्यायालय के शरण लेने बाध्य हैं । और इतना ही नहीं आपको सर्वोच्च न्यायालय तक का द्वार खटखटाना पड़ रहा हो । इस पर आपका कंप्यूटर यदि कहे कि मेरे आका, चिंता की कोई बात नहीं, मैं हूँ ना ! तो समझिए वह सच कह रहा है । यह अब बायें हाथ का खेल हो चुका है कि आप अपने किसी मामले को सुप्रीम कोर्ट में घर बैठे दायर कर सकते हैं । आपको पता होना चाहिए कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 2 अक्तूबर, 2006 से सर्वोच्च न्यायालय में ई-फाइलिंग की शुरुआत हो चुकी है ।
ई-फाइलिंग का मतलब है किसी भी नागरिक द्वारा इंटरनेट के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा दायर करने की सौगात । इस कार्य के लिए वकील से मदद की कोई आवश्यकता नहीं । ई-फाइलिंग के इच्छुक व्यक्ति को मात्र इंटरनेट पर जाकर सर्वोच्च न्यायालय के वेबसाइट- http://tempweb97.nic.in/sc-efiling/login.jsp को लॉगइन कर अपना पंजीकरण कराना होगा। चलिए हम ही दोहराये देते हैं कि पंजीकरण कराने के लिए आपको क्या-क्या करना होगा-

1. सर्वोच्च न्यायालय के ई-फाइलिंग सेवा का पहली बार उपयोग करने वाले को उसमें दिए गए साईन-अप विकल्प के माध्यम से अपने नाम का पंजीकरण कराना होगा। इंटरनेट पर यह पंजीकरण मुफ्त है और कोई भी अपने नाम का पंजीकरण करा सकता है।

2. पंजीकरण कराने के लिए इंटरनेट पर दो विकल्प आपको दिखेंगे- (1) यूजर नेम अर्थात् उपयोगकर्त्ता का नाम व (2) पासवर्ड।

3. ई-फाइलिंग के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में पीड़ित व्यक्ति अर्थात् मुकदमा दायर करने के इच्छुक व्यक्ति स्वयं और अनुबंधित वकील ही मुकदमा दायर कर सकता है।

4. पंजीकरण के लिए वहाँ पर दो विकल्प उपलब्ध होंगे –(1) एडवोकेट ऑन पर्सन अर्थात् आप वकील के रूप में अपना नाम पंजीकृत कराना चाहते हैं या (2) पेटिशनर इन पर्सन अर्थात् आप साधारण व्यक्ति के रूप में अपने को पंजीकृत कराना चाहते हैं। यदि आप कोई साधारण जनता है और मुकदमा दायर कराना चाहते हैं तो आपको पेटिशनर इन पर्सन के रूप में पंजीकृत करानी चाहिए। वकील एडवोकेट ऑन रिकार्ड के रूप में अपना नाम पंजीकृत करायें। दोनों के पहले खाली स्थान बना होता है और अपने उपयोग के अनुसार उसमें माऊस की सहायता से क्लिक कर दें।

5. एडवोकेट ऑन रिकार्ड के लिए “लॉग इन कोड” उनका एडवोकेट ऑन रिकार्ड कोड होगा जबकि साधारण व्यक्ति को साइन-अप विकल्प के द्वारा अपना लॉग-इन आईडी बनानी होगी। उसके बाद पासवर्ड डालनी जरूरी होगी। एक बार लॉग-इन आईडी बन जाने के बाद भविष्य में ई-फाइलिंग के लिए उसका उपयोग अनिवार्य होगा। सफलतापूर्वक लॉग-इन करने के बाद आप अपना मुकदमा इंटरनेट के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से दायर कर सकते हैं।

6. यहाँ पर आपके सामने फिर दो विकल्प होंगे- (1) नया मुकदमा व (2) संशोधित (यह मुख्य रूप से ई-फाइलिंग के तहत पहले से ही दायर की गई मुकदमा से संबंधित है)। नया मुकदमा वाले विकल्प पर क्लिक करके आप कोई नया मुकदमा दायर कर सकते हैं। संशोधित वाले विकल्प चुनने पर आपके द्वारा पहले से दायर किसी मुकदमे में सुधार करने का मौका दिया जाएगा।

7. सर्वोच्च न्यायालय में ई-फाइलिंग के लिए शुल्क केवल क्रेडिट या डेबिट कार्ड के माध्यम से ही जमा किया जा सकता है।

भारत सरकार को धन्यवाद देना होगा कि यह फीस भी ज्यादा नहीं है । यानी कि फोलियो प्रतिपेज 1 रुपया, सर्टिफिकेशन चार्ज 10 रुपये, शीघ्रता शुल्क 5 रुपये, रजिस्ट्री हेतु डॉक शुल्क 22 रुपये, थर्ड पार्टी शुक्ल 5 रुपये मात्र पर । इसकी भी सूचना बकायदा आपको ई-मेल से भेजी जायेगी । यदि आप अपने केश की स्थिति का जायजा लेना चाहते हैं तो उसकी भी व्यवस्था दुरुस्त है । http://causelists.nic.in/sccause/index1.html पर जाकर आप कॉजलिस्ट देख सकते हैं ।

चलते-चलते-
देश के किसी भी शहर में आपका तबादला हो गया और आपको वहाँ किराये का मकान चाहिए या आप वहाँ स्थायी रूप से प्रापर्टी खरीदना चाहते हैं तो आपके लिए ही कुछ खास साइटें हैं– www.Indiaproperty.com, www.99acres.com, www. Magicbricks.com, Indiaproperties.com । ये साइटें ब्रम्हास्त्र हैं – चाहें तो आप पसंदीदा फ्लैट, बंगला आदि का चित्र भी देख सकते हैं । यहाँ आपको त्वरित ऋण सुविधा भी मिल जायेगी ।

Friday, October 05, 2007

रोजगार के द्वार तक पहुँचाता माऊस

वेब-विमर्श-01
यूँ तो कंप्यूटर रोजगार के सशक्त साधन के रूप में सर्वविदित हो चुका है पर अब उसका माऊस आपको सैकड़ों तरह के सरकारी नौकरियों और प्रायव्हेट कंपनियों मे इच्छित कैरियर्स तक पहुँचाने के लिए कटिबद्ध हो चुका है । चाहे आप किसी भी तरह के रोजगार के फ़िराक में क्यों न हों, वह भी अपनी मातृभाषा हिंदी में । यानी कि बिना अंग्रेज़ी जाने भी आप कैफे या घरेलु इंटरनेट की सहायता से दुनिया भर में रोजगार के अवसरों, परीक्षा और चयन पद्धतियों, तैयारी हेतु वांछित प्रयास और अन्य तरह की उपयोगी जानकारी पलक झपकते ही हासिल कर सकते हैं । इसे सच कर दिखाया है – श्री संजय सुमन ने और वहाँ तक पहुंचने के लिए सिर्फ आपको एक्सप्लोरर के एड्रेस बार पर सिर्फ www.careersalah.com लिखना है । कैरियर्स सलाह इंटरनेट पर रोजगार पर पहली हिंदी वेबसाइट है ।

आज का यथार्थ यही है कि रोजगार के ढेरों अवसर उपलब्ध होने के बाद भी हमारे युवा समुचित मार्गदर्शन के अभाव में तदर्थवाद के शिकार होकर अपनी योग्यता से कम स्थिति वाला रोजगार भी स्वीकार लेते हैं । कुछ तो ऐसे होते हैं कि योग्यता के बावजूद भी वांछित सफलता हस्तगत नहीं कर पाते । हमारी शैक्षणिक संस्थायें भी इतनी कारगर नहीं है कि वे अध्ययन के दौरान ही सभी छात्रों को एक समुचित रोजगार के द्वार तक पहुँचाने में मदद कर सकें । कैरियर्स सलाह नामक यह साइट ऐसी विकट परिस्थितियों से गुजरने वाले खासकर ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए अत्यंत लाभप्रद सिद्ध हो रहा है । इस जाल-स्थल इन्हीं उद्देश्यों को लेकर संचालित है जहाँ कोई भी छात्र किसी भी कैरियर्स के बारे में निःशुल्क सलाह प्राप्त कर सकता है ।

कैरियर्स चयन से पहले नामक स्तम्भ पर जाकर सरलता से तृतीय श्रेणी से लेकर आईएएस जैसे उच्चस्तरीय शासकीय पदों पर नियुक्ति होने के विषय में सारी संभावनाओं को स्वयं आंका जा सकता है । छात्रोपयोगी स्तम्भ - असीमित रोजगार विकल्प, आगामी प्रतियोगिता परीक्षाएं, रोजगार रिक्तियाँ एवं पाठ्यक्रम, विश्वविद्यालय एवं संस्थान, विदेशों में अध्ययन, कोचिंग संस्थान का चयन, कैरियर्स पत्र-पत्रिकाएं कैरियर्स पुस्तकें आदि के सहारे विद्यार्थी या एक पढ़ा लिखा नौजवान सभी तरह की अद्यतन जानकारियों और सूचनाओं से स्वयं की तैयारी बड़े बेहत्तरीन ढंग से कर सकता है । यहाँ टाइम पास नामक कुछ खास कॉलम भी दिये गये हैं जिसमें स्वस्थ कैसे रहें, महत्वपूर्ण शब्दकोश, विश्वकोश, पत्र लेखन प्रारूप, ज्ञान गंगा, क्विज आदि रोचक और ज्ञानवर्धक हैं । इनके बारे में इतना ही कहा जाना पर्याप्त होगा कि यह जाल स्थल एक संपूर्ण कैरियर्स पत्रिका है । इस साइट की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहाँ हिंदी की जानी-मानी कैरियर्स पत्रिका ‘प्रतियोगिता दर्पण’ के संपादकीय विभाग में प्रमुख, दैनिक आर्यावर्त के पूर्व रोजगार मंच सलाहकार व 1989 से कैरियर्स सलाहकार के रूप में सक्रिय और सफल संजय सुमन नियमित रूप से परामर्श देते हैं ।

इस जाल स्थल(website) पर जो भी छात्र एक बार पहुँचेगा, वह बार-बार पहुंचना चाहेगा । इसका कारण यहाँ रोजगार से संबंधित सभी प्रकार के साइटों तक जाकर अपने ज्ञान और जानकारी को अधिक कारगर बनाने के लिंक दिया जाना है । इस साइट की सहायता से अब तक दस हजार से अधिक शिक्षित नौजवान दुनिया भर के रोजगार अवसरों, रिक्तियों, चयन-प्रक्रिया, आवश्यक तैयारिया घर बैठे कर चुके हैं । हजारों वांछित रोजगार भी प्राप्त कर चुके हैं । अक्सर हम ऊँची डिग्री लेने के नाम पर फर्जी संस्थानों के शिकार हो जाते हैं ऐसे लोगों के लिए भी यह जाल स्थल एक मार्गदर्शक की तरह है । सच कहें तो जो नियमित रूप से पत्र-पत्रिका नहीं खरीद सकते उनके लिए बिना किसी शुल्क पर सम्यक और समस्त जानकारी देना कम चुनौती भरा नहीं पर इस जाल-स्थल के संचालन टीम इस चुनौती में खरे हैं । उस पर भी यह साइट बिना किसी विज्ञापन (कार्टून - रोजगार को छोड़कर)के संचालित है।

कुल मिलाकर यह हजारों तरह के रोजगार और शैक्षिक पाठ्यक्रम की ए टू जेड तक की जानकारी देने में सफल साइट है और इस रूप में संजय सुमन के परिश्रम की प्रशंसा की जा सकती है, मागर्दशन के नाम पर हजारों-लाखों रूपये खर्च करने वाले सरकारी संगठनों के लिए भी यह साइट एक पाठ की तरह है जिसे कम से कम हिंदी भाषी राज्य सरकारों को अपनाना चाहिए ।

चलते-चलते –
रफ़्तार (www.raftaar.com)पर कभी जाकर देखा क्या ? नहीं ना, आज ही उसे आजमा कर देखिए । यह एक महत्वपूर्ण हिंदी सर्च इंजन है । इतना ही नहीं इस जाल स्थल पर हिंदी की-बोर्ड की भी सुविधा है जिससे आप बिना हिंदी टाइप जाने मात्र देखकर मैन्युअली शब्द टाइप कर सकते हैं और वांछित जानकारी की वेब-स्थल तक क्षण भर में पहुँच सकते हैं । हिंदी में लिखने की तकनीक भी यहाँ मुफ़्त में सिखायी जाती है ।